एपस्टीन की फाइलों से साफ जाहिर होता है कि कुलीन वर्ग कैसे काम करता है
–मार्गरेट किम्बली
2019 में, जेफरी एपस्टीन की मृत्यु हो गयी थी, जो कई सालों तक सुर्खियों में बना रहा और आज भी डोनाल्ड ट्रम्प के साथ अपने लम्बे सम्बन्धों के कारण चर्चाओं में बना हुआ है। यह डोनाल्ड ट्रम्प का दूसरा कार्यकाल है। इस करोड़पति फाइनेंसर का पूरी दुनिया के शक्तिशाली लोगों के साथ वित्तीय और राजनीतिक सम्बन्धों का एक पूरा जटिल जाल था। शायद उन्हें शक्तिशाली लोगों को अपने प्रभाव में लेने के लिए की जाने वाली यौन तस्करी के लिए सबसे अधिक जाना जाता था, लेकिन ऐसा लगता है कि यह गतिविधि, जो आम तौर पर जानी जाती है, एक तरह से उसका अतिरिक्त धंधा (साइड बिजनेस) था।
एपस्टीन दुनिया के राजनीतिक और वित्तीय अभिजात वर्ग में ऊपरी तबके के लोगों के बीच सक्रिय था। उसने शक्तिशाली लोगों के लिए केवल दलाली ही नहीं की बल्कि उससे कहीं ज्यादा काम किया है, क्योंकि वह इजराइल, ब्रिटेन के राजनेताओं और अन्तरराष्ट्रीय कारपोरेट हितों के लिए काम करता था। अपराध में उसकी साथी घिसलेन मैक्सवेल, जो आज एक फेडरल जेल में बन्द है, लेकिन उसने अपना जीवन ब्रिटिश अभिजात वर्ग में ऊपरी तबके की सदस्या के रूप में शुरू किया था। उसके पिता राबर्ट मैक्सवेल एक यहूदी, चेक मूल के समाचार पत्र व्यवसायी होने के साथ–साथ एक कट्टर और सक्रिय जायोनिस्ट भी थे। 1991 में अपनी नाव से गिरने के कारण मैक्सवेल की मृत्यु हो गयी थी। जिसके पश्चात, उन्हें इजराइल में तत्कालीन प्रधानमंत्री यित्जाक शामिर की उपस्थिति में दफनाया गया था।
न्याय विभाग द्वारा 30 लाख से अधिक पन्नों की फाइलें जारी की गयी है। जिनमें तस्वीरें और ईमेल शामिल हैं। एपस्टीन पर नजर रखने वालों के लिए यह सूचनाओं का खजाना हैं। इन फाइलों की सामग्री एपस्टीन के बारे में पहले से ज्ञात कई बातों की पुष्टि करती है और उसकी सम्पत्ति और राजनीतिक गतिविधियों के बारे में पहले से अज्ञात विवरणों को भी जोड़ती है। यौन घोटालों पर इतना अधिक जोर देने से ऐसी गतिविधियाँ छिप गयी हैं जो इस बारे में खुलासा करती हैं कि सत्ताधारी वर्ग किस तरीके से शासन करता है और ये गतिविधियाँ भी उतनी ही खतरनाक हैं।
एपस्टीन कई सालों तक अदालती फैसले से बचता रहा, लेकिन आखिरकार 2019 में न्यूयार्क शहर की जेल में उसकी मृत्यु हो गयी। उसकी मृत्यु का कारण आत्महत्या बताया गया था, लेकिन इस निष्कर्ष पर आज तक सन्देह बना हुआ है। उसके जैसे लोगों के मामले में ऐसे सवाल उठना स्वाभाविक है। एपस्टीन की अनुमानित सम्पत्ति 578 मिलियन डॉलर थी और वह डोनाल्ड ट्रम्प, बिल क्लिंटन और ब्रिटेन के शाही परिवार के एक पूर्व प्रिंस का मित्र था, जो अब प्रिंस नहीं हैं, बल्कि परिवार को घोटालों से दूर रखने की जरूरत के लिहाज से अब केवल एण्ड्रयू माउंटबेटन–विण्डसर के नाम से जाना जाता है।
एपस्टीन यहूदी था, लेकिन अब दस्तावेजों से पता चलता है कि वह यहूदी वर्चस्व में भी विश्वास रखता था और कथित तौर पर लोकतांत्रिक देशों के अधिकारियों के साथ अन्तरराष्ट्रीय शासक वर्ग और जायोनिस्टों की ओर से काम करता था। इस कहानी पर नजर रखने वाले हर व्यक्ति को एपस्टीन के इजराइल से सम्बन्धों के बारे में अच्छी तरह से पता है, लेकिन गैर–यहूदियों, जिन्हें वह अक्सर अपने ईमेल में “गोइम” लिखता था, के प्रति उसका रवैया एक नया खुलासा है। “यहूदी इसी तरह पैसा कमाते हैं–––––और पिछले दस सालों में शिपिंग फ्यूचर्स को शार्ट सेल करके उन्होंने खूब पैसा कमाया है, गोइम को असली दुनिया में कारोबार करने दो,” एपस्टीन के ईमेलों में मिले संदेशों में से एक संदेश ऐसा ही है। जब एक हालीवुड प्रचारक ने पूछा कि क्या कोई कार्यक्रम “सौ फीसदी यहूदी नाइट” होगा, तो उसने जवाब दिया कि, “नहीं, बहुत सारे गैर–यहूदी होंगे– जेपी मार्गन के एग्जीक्यूटिव, ब्रिलैन्ट डब्लूएएसपी।”
यहूदी वित्तीय और राजनीतिक सत्ता के विषय पर किसी भी प्रकार की चर्चा आमतौर पर वर्जित होती है, क्योंकि ऐसा करने पर निश्चित रूप से यहूदी–विरोधी करार दिया जाता है। लेकिन दस्तावेजों के उस भयावह संग्रह और एपस्टीन के खुद के शब्दों ने दस्तावेजी तथ्यों को सामने लाने का मौका दे दिया है।
कार्पाेरेट जगत के नेताओं, इजरायली सरकार और एपस्टीन जैसे अन्तरराष्ट्रीय वित्तदाताओं के साथ उसके सम्बन्धों के जाल की गहराई से पड़ताल करने की कमी, अभी तक बाकी है। यह ठीक बात है कि, यौन तस्करी और नाबालिगों के यौन उत्पीड़न की घटना पर जोर देने से लोगों का काफी ध्यान इस मामले की ओर आकर्षित हुआ है, लेकिन हमें एपस्टीन के बारे में और भी बहुत कुछ जानना चाहिए। अभिजात वर्ग के साथ उसके सम्बन्ध हमें यह समझने में मदद करते हैं कि दुनिया वास्तव में कैसे काम करती है।
ब्रिटेन में, पीटर मेण्डेलसन को हाउस आफ लार्ड्स और लेबर पार्टी से इस्तीफा देने के लिए मजबूर होना पड़ा, क्योंकि यह खुलासा हुआ था कि उन्होंने 2008 के शेयर बाजार संकट के दौरान सरकार को राहत देने की योजना के बारे में सरकारी जानकारी एपस्टीन को लीक कर दी थी। मेण्डेलसन और उनके पति ने एपस्टीन से सीधे धन भी प्राप्त किया था।
मेण्डेलसन कोई साधारण व्यक्ति नहीं हैं। वे पूर्व में संयुक्त राज्य अमरीका में ब्रिटेन के राजदूत, संसद के पूर्व सदस्य और न्यू लेबर पार्टी के एक प्रमुख नेता रह चुके हैं–अर्थात् पार्टी का वह गुट जिसने वामपंथियों को पार्टी से बाहर कर दिया था और जेरेमी कार्बिन के नेतृत्व को कमजोर किया था। मेण्डेलसन कई सालों से प्रभावशाली व्यक्तित्व रहे हैं और एपस्टीन के साथ उनके सम्बन्ध इस बात का मात्र एक संकेत हैं कि दुनिया कैसे काम करती है, यहाँ तक कि उन देशों में भी जो अपनी जनता के हित में काम करने वाले लोकतांत्रिक देश होने का दावा करते हैं। यह स्पष्ट था कि कार्बिन को कभी प्रधानमंत्री नहीं बनने दिया जाएगा। शक्तिशाली लोग, यहाँ तक कि वे लोग भी जो ऊपरी तौर पर एक ही पार्टी के थे लेकिन पर्दे के पीछे साजिशें रचते रहे और मीडिया के साथ मिलीभगत करते रहे ताकि जनपक्षधर नीतियों का एक छोटा सा हिस्सा भी लागू न हो सके।
2010 में, मेण्डेलसन ने एपस्टीन को ईमेल किया कि उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री गार्डन ब्राउन को गठबंधन सरकार बनाने में विफल रहने के बाद इस्तीफा देने के लिए मना लिया था। “आखिरकार आज उन्हें इस्तीफा देने के लिए राजी कर लिया।” ब्राउन ने अगले ही दिन इस्तीफा दे दिया और रूढ़िवादी टोरी पार्टी सत्ता में वापस आ गयी। तथाकथित वामपंथी लेबर पार्टी वास्तव में और आज भी उन सिद्धांतहीन लोगों के कब्जे में है जिनके लिए वामपंथी और दक्षिणपंथी जैसे लेबल अर्थहीन हैं।
एपस्टीन ने 1993 की ओस्लो प्रक्रिया में भी भूमिका निभाई थी, जिसने फिलिस्तीन को बुरी तरह प्रभावित किया था। नार्वे के विवाहित राजनयिक दम्पति, मोना जूल और टेर्जे रोएड लार्सन ने ओस्लो समझौते में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी और उनका नाम एपस्टीन से तनख्वाह पाने वाले लोगों की सूची में भी शामिल था। लार्सन ने एपस्टीन से 130,000 डॉलर का निजी तौर पर कर्ज भी लिया था और एपस्टीन से 650,000 डॉलर का दान प्राप्त होने का खुलासा होने के बाद उन्हें अन्तरराष्ट्रीय शान्ति संस्थान के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देना पड़ा था। बताया जाता है कि एपस्टीन की वसीयत में जूल और लार्सन के बच्चों को 10 मिलियन डॉलर का हिस्सा मिला था। संयुक्त राष्ट्र के पूर्व अधिकारी क्रेग मोखीबर कहते हैं, “मैं यह साबित नहीं कर सकता कि इजराइल ने फिलिस्तीन पर काम कर रहे संयुक्त राष्ट्र के राजनीतिक अधिकारियों को भ्रष्ट किया है, लेकिन में जानता हूँ कि लार्सन और उनके उत्तराधिकारियों ने संयुक्त राष्ट्र दूतों (यूनेस्को) के रूप में लगातार अन्तरराष्ट्रीय कानूनों और फिलिस्तीनी लोगों के मानवाधिकारों के बजाय इजराइली शासन के इरादों को प्राथमिकता दी है।” नार्वे की राजधानी ओस्लो में निश्चित रूप से बेहद शर्मिंदगी की स्थिति बनी हुई है, जहाँ इस प्रक्रिया का विवरण देने वाले दस्तावेज आधिकारिक अभिलेखागार से ही गायब हो गये हैं। रोएड लार्सन ने निजी तौर पर छिपाकर रखे गये हथियारों को स्वीकार किया है, लेकिन उन्हें राज्य को लौटाने से साफ इनकार कर दिया है।
एपस्टीन के एक सहयोगी ने 2011 में नाटो द्वारा सत्ता परिवर्तन की साजिश के बाद लीबिया की लूट में शामिल होने की वकालत की है। उनका लक्ष्य 80 अरब डॉलर की जब्त सम्पत्ति थी। “मैं पाल, हेस्टिंग्स, जानोफ्स्की और वाकर नामक कानूनी फर्म से बात कर रहा हूँ––– ताकि वे कुछ शर्तों के आधार पर पैसे की वसूली कर सकें––– लेकिन हमारे लिए फायदेमन्द होगा कि हम उन्हें प्रति घंटे की दर से भुगतान करें और शुरुआत में आसान सम्पत्तियों पर ध्यान केंद्रित करें, जिससे हम ज्यादा पैसा अपने पास रख सकें। मेरे कुछ दोस्त भी हैं, जो पहले एमआई–6 (यूके की विदेशी खुफिया एजेंसी) और मोसाद से जुड़े थे और वे चोरी की गयी संपत्तियों की पहचान करने और उन्हें वापस लाने में मदद करने को तैयार हैं।“ एपस्टीन ने अपने जवाब पर कोई आपत्ति नहीं जाहिर की, बस इतना ही कहा कि “लीबियाई लोग अब वैध हैं––– उस पैसे पर कई दावे होंगे।”
कुकर्मों और अन्दरूनी मिलीभगत की सूची बहुत लम्बी है और अभी भी लाखों फाइलें हैं जिन्हें जारी किया जाना बाकी है और नवीनतम खेप में भारी मात्रा में काट–छाँट की गयी है। अपराध कितने बड़े पैमाने का है, यह बात अभी भी अज्ञात है।
एपस्टीन का मामला धन और सत्ता के उच्च वर्गों की एक जरूरी झलक दिखाता है। यह इसलिए जरूरी है कि, जनता को यह पता चले कि वास्तव में उनका प्रभाव कितना कम है। जबकि हमें हर अवसर पर मतदान करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है, एपस्टीन जैसे लोग ही तय कर रहे हैं कि क्या होगा और क्या नहीं होगा। वे खुफिया एजेंसियों, कानूनी फर्मों, राजनीतिक दलों और मीडिया के साथ मिलकर अपना घिनौना काम करते हैं और दुनिया की जनता को इसकी रत्तीभर भी खबर नहीं। अगर उनका यौन शोषण और डोनाल्ड ट्रम्प का उन फाइलों को सार्वजनिक करने का (अब पछतावे भरा) वादा न होता, तो आज हमारे सामने उस भष्ट्राचार के इतने साफ सबूत नहीं होते जो पूरी दुनिया को चला रहा है।
‘मंथली रिव्यू डाट ओआरजी से साभार’
(अनुवाद–सोनू पवाँर)
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