मई 2026, अंक 50 में प्रकाशित

हो ची मिन्ह के देश में

–– भगवान स्वरूप कटियार

किताबें, संगीत और यात्राएँ हमेशा से मेरी घनिष्ठ दोस्त रही हैं और ताजिन्दगी रहेंगी। बस फर्क इतना है कि संगीत की मधुर ध्वनियाँ और किताबें तो हर पल मेरे इर्द–गिर्द ही रह कर मुझे गुदगुदाती रहती हैं। पर यात्राएँ महबूबा की तरह बहुत इन्तजार कराती हैं। इस खूबसूरत धरती का चप्पा–चप्पा, आसमान में झिलमिल चमकते सितारों, बच्चों की मोहक मुस्कान और बगीचे में फूलों पर मडराती तितलियों की तरह मुझे इशारों से बुलाते हैं और मैं तड़प उठता हूँ उनसे मिलने के लिए। मेरी यह तलब नशे की तरह मुझे मदहोश कर देती है और तब मैं भूल जाता हूँ अपनी उम्र की सीमाओं को भी। दरीचे खुलते जाते हैं और यह विराट दुनिया मुझ में समाती चली जाती है।

विगत अक्टूबर 2025 में अपनी बहू–बेटी अदिति के पास पुणे गया था और फिर वहीं से गोवा गया। वह भी मेरी एक बड़ी रोमांचक यात्रा थी। लेकिन वियतनाम बहुत दिनों से मेरे दिलोदिमाग में एक सपने की तरह हलचल मचाये हुए था। वियतनाम के नैसर्गिक सौन्दर्य से मैं बिलकुल नावाकिफ था। पर एक स्वाभिमानी बहादुर देश के रूप में वियतनाम मुझे बहुत आकर्षित करता रहा है। निडरता और आत्मसम्मान का गुण चाहे किसी देश का हो या किसी शख्स का उसकी शख्शियत में चार चाँद लगा देता है। आज से लगभग 15–20 साल पहले मैंने वियतनाम पर एक कविता भी लिखी थी जो मेरे तीसरे संग्रह में संकलित है। वियतनाम जाने के लिए सोचता तो किसी साथी या ग्रुप की तलाश में रहता। पर यह हर समय मुमकिन हो जरूरी नहीं है। पर घुमक्कड़ी की लत चुप कहाँ बैठने देती।

इसी बीच 14 जनवरी 2026 की शाम को मेरे प्रिय सम्मानीय दोस्त बुद्धिस्ट माँन्क प्रोफेसर डॉ– उपानन्द भन्ते जी के फोन की घण्टी घनघनायी। वे बौद्ध शोध संस्थान में प्रोफेसर हैं। यह उनकी शिष्टाचार कॉल थी हालचाल जानने के लिए। पिछले साल उन्हीं के नेतृत्व में कम्बोडिया गया था। उन्हें अपने बुद्धिस्ट मित्रों के ग्रुप बुद्धिस्ट देशों और देश के बुद्धिस्ट स्थलों के दिग्दर्शन कराने का अच्छा शगल है। एक तरह से इतिहास और बौद्ध दर्शन के प्राध्यापक होने के नाते वह अपने मित्रों को अपने छात्र मित्रों की तरह इतिहास और बौद्ध दर्शन के चिन्तन से साक्षात्कार कराना और उसे आत्मसात करने के अवसर और माहौल उपलब्ध कराना अपने पुनीत कर्तव्य की तरह वे बखूबी निभाते हैं।

भन्ते जी चीवर के लिबास में एक युवा सचेत बौद्ध सन्यासी और मार्ग दर्शक मित्र के रूप में बहुत भले और आकर्षक लगते हैं। हम सब उनसे बेहद प्रभावित होते है। उनकी विनम्र शालीनता और विद्वता का मिश्रित व्यक्तित्व किसी की भी प्रभावित किये बिना नहीं रहता। मैंने नमो बुद्धाय के पारस्परिक अभिवादन के बाद वियतनाम भ्रमण की इच्छा जतायी। बोले 21जनवरी को ग्रुप जा रहा है। मैंने कहा प्लीज मुझे एकौमडेट करलें मैं डाकुमेंट भेज रहा हूँ। उन्होंने जिस तत्परता से मेरे एयर टिकट और अर्जेंट वीजा कराया वह किसी करिश्में से कम नहीं था जिसमें दो इंटरनेशनल और चार वियतनामी डामेस्टिक फ्लाइट्स भी शामिल थीं। वियतनाम की कई हजार किलोमीटर की आतंरिक यात्राएँ सड़क मार्ग, आकाशमार्ग और जल मार्ग से तय की जो जितनी रोमांचक रहीं उससे कहीं ज्यादा प्राकृतिक सौन्दर्य से अभिभूत करने वाली रहीं। एशिया का स्वीटजरलैण्ड है वियतनाम चाचा हो ची मिन्ह का देश। फिर क्या था हमने 20 जनवरी शाम को लखनऊ से दिल्ली के लिए उड़ान भरी और वहाँ से रात 12 बजे वियतनाम एयरलाइन्स की फ्लाईट जिसे विएटजेट एअर डाटकॉम कहते हैं वहाँ से वियतनाम की राजधानी हनोई के लिए उड़ान भरी। हमारी इस यात्रा में स्त्री पुरुष और दो छात्राएँ कुल मिला कर 32 मित्रों का कुनबा था जिसमें उत्तर प्रदेश, दिल्ली और हरियाणा के लोग थे। 21 जनवरी 2026 को सुबह 6–6–30 के बीच सूर्याेदय की लाली के रंग में डूबे आसमान से उतर कर जैसे ही विमान ने वियतनाम की धरती को छुआ, तमाम थकावट और अधूरी नींद से कुनमुनाते सभी यात्री मित्रों के चेहरे सुर्ख गुलाब के फूलों की तरह खिल उठे। एयरपोर्ट पर वियतनाम के नायक हो ची मिन्ह की तस्वीरें देख कर मन में उनके प्रति सम्मान के भाव उभर रहे थे। हो ची मिन्ह को वियतनाम का गाँधी भी कहते हैं। वह फ्रांस कम्युनिस्ट पार्टी के संस्थापक सदस्य भी रहे हैं। उनके लिए गाँधी का यह रूपक उनकी सादगी और देशभक्ति के प्रति सम्मान भाव है। कई जगह तस्वीरों में गाँधी और चाचा हो ची मिन्ह साथ–साथ दिखे। यह वियतनामियों का भारत के प्रति प्रेम और आदरभाव दिखाता है। बापू और चाचा एक दूसरे के पर्याय ही तो हैं।

हमारे स्वागत में खड़े वियतनामी युवाओं और युवतियों ने नमो बुद्धाय और नमस्ते के सम्बोधन से गुलाब भेंट कर जिस तरह अभिवादन किया उससे हम सबके दिलों के गुलाब खिल गये। पूरा हनोई शहर अपनी हरियाली और फूलों की रंगत से सजा–धजा एक जाँबाज कामरेड की तरह मुस्कराते हुए हम सबका स्वागत कर रहा था। वियतनाम में नेशनल एसेम्बली के चुनाव चल रहे थे। सभी सड़कों और चैराहों पर हंसिया हथौड़ा और सितारे वाले लाल झण्डे हवा में लहरा रहे थे। पर हमारे यहाँ की तरह कहीं कोई भीड़–भाड़ और शोर–शराबा नहीं था।

हनोई की सड़कों पर हमारे 32 यात्रियों का कोच तेज रफ़्तार से होटल में ले जा रहा था। हम सड़क की दोनों ओर खिड़कियों से हनोई शहर को जिज्ञासु निगाहों से निहार रहे थे और अपने गाइड का वियतनाम के बारे परिचयात्मक वक्तव्य सुन रहे थे। आँखों में नींद भरी थी यानी यात्रीगण उनींदी आँखों का आलस्य और थकावट अँगड़ाई लेकर अपनी शारीरिक जकड़न को ढीला कर रहे थे। अपने यहाँ टाटा की तरह वियतनाम में हुण्डई की बसें चलती हैं जिसे सड़क पर चलता हवाई जहाज कहें तो अतिशयोक्ति न होगी, निहायत आरामदेह और साफ सुथरी। हनोई शहर भी पूरी तरह साफ–सुथरा तरोताजा होकर अपने दैनिक सफर के लिए तैयार हम यात्री मित्रों को अपना खैरमकदमी सलाम फरमा रहा था। हमारे ग्रुप के सभी साथी विभिन्न विभागों के बड़े ओहदों से सेवानिवृत अधिकारी थे। जज, डाक्टर, आरटीओ, डीएफो, निदेशक, जर्नलिस्ट–राइटर आदि विभिन्न पेशों के लोग थे। हमारे ग्रुप लीडर डा– उपानन्द ही 45 वर्ष के थे और दोनों छात्र बालिकाएँ 18–20 वर्ष की थीं। शेष सभी सीनियर सिटिजन जिनमें नौजवानों जैसा जोश–खरोस और उत्साह था। यात्रा स्वयं में एक फुल अनुशासित टास्क की तरह होती है। यात्रा का लुत्फ लेना है तो सेना के जवान की तरह सचेत, जागरूक और अनुशासित रहना होता है और विदेश यात्रा में तो यह और भी जरूरी हो जाता है। ग्रीन सूट होटल में चेक इन कर आधा घंटे में फ्रेश होकर उसी कोच से रेस्तराँ जाकर ब्रेकफास्ट कर स्थानीय भ्रमण पर निकलना था। थकावट और नींद का तो कुछ अतापता ही नहीं था क्योंकि टास्क अब सामने था।

मैं अपने पाठकों को अपने साथ पूरे नौ दिन वियतनाम के खुबसूरत–हसीन प्राकृतिक रोमांचक और ऐतिहासिक–पुरातात्विक नजारों का लुत्फ उठाने का अवसर दूंगा इसलिए इस मेजबान दोस्त देश का संक्षिप्त ऐतिहासिक, भौगोलिक और सांस्कृतिक परिचय भी जरूरी है। पहला परिचय तो यही कि वियतनाम लगभग 10 करोड़ की आबादी का छोटा सा हमारा पड़ोसी देश, भारत की तरह ही एक कृषि प्रधान देश है जहाँ 70फीसदी आबादी गाँवों में रहती है और 30 फीसदी शहरों में रहती है। दक्षिणी पूर्व एशिया के दो देश जापान और वियतनाम युद्धों की विभीषिका में झुलसे और नेस्तनाबूत हुए जो आज दोनों दुनिया की मजबूत अर्थव्यवस्थाओं के रूप में सीना ताने खड़े हैं। दक्षिण पूर्व एशिया के इण्डो चाइना (हिन्द चीन) देश जिनमें प्रमुख हैं थाईलैण्ड, कम्बोडिया, लाओस और वियतनाम चारो देश चावल उत्पादन और उसके निर्यात के लिए दुनिया भर में जाने जाते हैं। इन देशों के चावल की उच्च्सतारीय गुणवत्ता के कारण उसकी माँग दुनिया भर में है। इस पूरे इण्डो चाइना क्षेत्र को एशिया का धान का कटोरा कहा जाता है। इन चारों देशों में पारस्परिक समझदारी के कारण सामजिक–आर्थिक और सांस्कृतिक रिश्ते भी बहुत मजबूत और सद्भावपूर्ण हैं। अब तो इनके साथ दक्षिण कोरिया और फिलीपीन्स जुड़ गये हैं। इनके पारस्परिक व्यापारिक रिश्ते इनकी अर्थव्यवस्था को बल देते हैं। ये सभी देश सड़क मार्ग और जलमार्ग से जुड़े हुए है और बगैर वीजा के कुछ निर्धारित नियमों के आधार पर नागरिकों का इन देशों में आना–जाना प्रचलित है। वियतनाम 3,26,797 वर्ग किमी क्षेत्रफल में फैला उत्तरी, दक्षिणी और मध्य क्षेत्र को समेटे मानचित्र में अंग्रेजी के एस (ै)आकार में है। हिन्द चीन क्षेत्र के अन्य सभी देशों की तरह वियतनाम में भी 90 फीसदी लोग बौद्ध धर्म के मानने वाले हैं, शेष 10 फीसदी में हिन्दू, मुस्लिम, क्रिश्चियन और अन्य समुदाय के लोग रहते हैं। कम्युनिस्ट देश होने के नाते धार्मिक मामलों में राज्य का कोई दखल नहीं है। सरकार समाज में वैज्ञानिक तर्कशीलता को बढ़ावा देती है। यहाँ 90 फीसदी किन्ह समुदाय के लोग हैं, शेष 10 फीसदी में अन्य समुदाय, जैसे–– खेमेर, चैम्स और चीनी आदि। वैसे इस देश को सोशलिस्ट रिपब्लिक ऑफ वियतनाम कहते हैं। हो चि मिन्ह के नेतृत्व में इसका राजनैतिक गठन एक कम्युनिस्ट देश के रूप में हुआ। राज्य का कोई धर्म नहीं है। लेकिन नागरिकों को किसी भी धर्म के अनुपालन की पूरी स्वतंत्रता है –– “फ्रीडम इन फेथ” के रूप में। बौद्ध धर्म का गहरा असर होने के कारण लोगों में शालीन विनम्रता, मैत्री भाव, पारस्परिक सहयोग, करुणा और कर्तव्यपरायणता उनके आचरण और जीवन शैली में स्वाभाविक रूप में घुला हुआ है। वियानामी स्त्री–पुरुष और बच्चे बेहद खुश मिजाज, मिलनसार और मेहनती होते हैं। वियानामी लोग थोड़ा छोटे कद के गोरे चिट्टे चमकती आँखों वाले चुस्त–दुरुस्त होते हैं। वियतनाम में मुझे यूरोप की तरह मुटापा दिखायी नहीं दिया और न ही भारत की तरह भिखारियों की भीड़ दिखी। यहाँ की महिलाएँ बेहद खुबसूरत और मेहनती होती हैं। महिलाएँ हर क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान के साथ पुरुषों के बराबर और कहीं –कहीं तो उनसे आगे दिखती हैं। अमरीकी युद्ध में महिला सैनिकों की शौर्य गाथाएँ भी उल्लेखनीय हैं। इसका प्रत्यक्ष अनुभव मैंने वियतनामी युद्ध पर आधारित नावेल “सॉरो ऑफ वार” को पढ़ते हुए हुआ जो स्त्री–पुरुष सैनिक जोड़े की प्रेम कहानी के जरिये अमरीकी–वियातनाम युद्ध की त्रासदी और वियतनामी शौर्य की जीवन्त तस्वीर पेश करती है।

वियतनाम का इतिहास भी तीसरी दुनिया के औपनिवेशिक देशों की तरह अनेक उतार–चढ़ावों और संघर्ष का इतिहास है। वियतनाम अपने देश के नागरिकों के संघर्ष और कुर्बानियों से निर्मित देश है। दुनिया के तमाम औपनिवेशिक देश साम्राज्यवादी एवं उपनिवेशवादी ताकतों से मुठभेड़ करते हुए उनकी गुलामी की बेड़ियों को तोड़ कर मुक्त हुए हैं, उनमें भारत भी एक है जो लगभग दो सौ साल ब्रिटिश साम्राज्य से जुझारू लड़ाई लड़ कर मुक्त हुआ। दुनिया के लगभग सौ से अधिक औपनिवेशिक देश जो अफ्रीकी, एशियाई, अमरीकी, लैटिन अमरीकी एवं आस्ट्रेलाई हैं उनकी स्वयं की एक बड़ी दुनिया है जो पूरी दुनिया की आधी दुनिया से बड़ी है। काश ये सारे स्वतंत्र औपनिवेशिक देश अपनी गुलामी के संघर्ष और बेमुरव्वत तकलीफों को बिरादराना मानते हुए अपनी समृद्धी और दुनिया की शान्ति और खुशहाली के लिए संगठित हो सके होते तो दुनिया का शातिराना नव उदारवादी पूँजीवाद, कार्पाेरेट साम्राज्यवाद के रूप में आज हमारे सामने न उभर पाता जिसने आर्थिक गुलामी और उपनिवेशवाद की मुहिम उन देशों के लिए शुरू कर दी है जिन्होंने उपनिवेशवाद का जुआ उतार फेंके अभी बहुत लम्बा समय नहीं हुआ है। अचरज की बात है आधुनिक आर्थिक उपनिवेशवाद का सरगना अमरीका है जो कभी ब्रिटिश उपनिवेश रहा था और 1776 में जार्ज वाशिंगटन के नेतृत्व ब्रिटिश गुलामी से मुक्त हुआ।

वियतनाम का मीकांग डेल्टा पहली और दूसरी शताब्दी में भारत, चीन और प्रसिया के सम्पर्क में रहा जो वहाँ की पुरानी इमारतों के पुरातात्विक अवशेषों से उजागर होता है। दूसरी शताब्दी के आखिरी दौर में चीन की राजशाही ने वियतनाम पर आक्रमण कर अपने अधीनस्थ कर लिया। लेकिन स्वभाव से स्वाभिमानी और लड़ाकू वियतनामी नागरिक चीनी सल्तनत से लगभग 1000 साल तक लड़ते रहे और 10वीं शताब्दी में वियतनाम ने चीन से आजादी हासिल कर एक सम्प्रभु स्वतंत्र देश का रूप ग्रहण किया। इसीलिए वियतनामी समाजिक जीवन में चीनी सभ्यता के अवशेष घुले हुए स्पष्ट रूप से देखने को मिलते हैं। चीनी सल्तनत से 938 सालों तक अपनी आजादी की लड़ाई लड़ते हुए वियतनाम की दो तुरंग बहनों हाई और बा की बहादुराना शहादत ऐतिहासिक रूप से उल्लेखनीय जिन्होंने लड़ते हुए अपने को चीनी सेना के सामने समर्पण करने के बजाय वियतनाम की लाल नदी (रेड रिवर) में अपने को जिन्दा डुबो दिया। वियानामी समाज में मंगोल, चीनी, खेमेर, चैम्स समुदाय के लोग घुलमिल कर वियतनामी हो गये। समाज और देश ऐसे ही बनते और आगे बढ़ते हैं। स्पेन और फ्रांस की सेनाओं ने संयुक्त रूप से 1858 में वियतनाम के डानांग क्षेत्र पर कब्जा कर लिया। यह सेनाएँ फिलिपीन्स से आयी थीं जो पहले से स्पेन का उपनिवेश था। फ्रांसीसी उपनिवेश बनने के पहले वियतनाम जापानी उपनिवेश भी रहा। एशिया में जापानी साम्राज्य का अधिपत्य पूरे दक्षिणी एशियाई देशों, जैसे–– चीन, कोरिया, सिंगापुर, इण्डो चाइना देशों पर रहा। पर 1945 में द्वितीय विश्व युद्ध में अमरीका के परमाणु हमले के बाद जापान को अपनी तबाही के कारण दक्षिण एशियाई देशों पर अपना अधिपत्य छोड़ना पड़ा। फ्रांसिसी उपनिवेशवाद से लड़ने के लिए वियतनाम के कम्युनिस्ट लीडर कामरेड हो ची मिन्ह ने 1925 में वियतनामी रेवोलूशनरी यूथ लीग का गठन किया। हो ची मिन्ह के नेतृत्व में यूथ लीग के युवा सैनिकों जिन्हें वियत मिन्ह कहा जाता था उन्होंने 1954 में फ्रांसिसी उपनिवेशवाद से मुक्त कराया। यह आजाद वियतनाम उत्तरी और दक्षिणी वियतनाम दो देशों के रूप में विभाजित था। उत्तरी वियतनाम की राजधानी हनोई और दक्षिणी वियतनाम की राजधानी सैगोन थी जिसका आधुनिक नाम हो ची मिन्ह सिटी है। भारत के प्रधानमंत्री 1954 में वियतनाम के स्वाधीनता समारोह में भाग लेने हनोई गये थे और 1956 में वियतनाम के प्रथम राष्ट्रपति हो ची मिन्ह नेहरू के आमंत्रण पर भारत आये थे। वियतनाम के उत्तरी भाग यानी लाल नदी (रेड रिवर) डेल्टा को टोंकिन और दक्षिणी क्षेत्र को मीकांग डेल्टा कहते हैं। इसका दक्षिण चीन सागर के खुबसूरत समुद्र तटों और झीलों का क्षेत्र मध्यक्षेत्र भी है।

अभी भी वियतनाम अपने राजनैतिक संकटों से मुक्त नहीं था। दक्षिणी वियतनाम की कम्युनिस्ट विरोधी देयाम सत्ता से कम्युनिस्ट गुरिल्लाओं से मुठभेड़ हुई और देयाम अपने ही सैनिकों के हाथों मारा गया। कम्युनिस्ट गुरिल्लाओं को वियतकांग कहा जाता था। दक्षिणी वियतनाम के नागरिकों का झुकाव उत्तरी वियतनाम की कम्युनिस्ट शासन की तरफ था जो देयाम के निरंकुश और क्रूर शासन से असन्तुष्ट और परेशान थे। नार्थ वियतनाम आर्मी 1964 में सैगोन में घुस गयी और दक्षिणी वियतनाम पर कब्जा कर लिया। कोरिया में हो या वियतनाम में समाजवादी सरकारों को देख कर समाजवाद का दुश्मन अमरीका चुप कैसे बैठ सकता था? दुनिया में समाजवादी ताकतें न पनपने पायें इसके लिए अमरीका अपना धन और सैन्य बल झोंकने को हमेशा तत्पर रहता था। इस तरह के सामरिक हस्तक्षेपों में अमरीका अब तक 8 ट्रिलियन डॉलर खर्च कर चुका है जो देश खुद उपनिवेश रहा वह आज सबसे बड़ा उपनिवेशवादी देश बन कर आर्थिक गुलामी की वैश्विक मुहिम का बड़ा चैधरी बना बैठा है और इसी तरह उसका सहयोगी यहूदियों का देश इज्राइल जिसने नाजी क्रूरता की त्रासदी को सबसे ज्यादा भोगा, आज फिलिस्तीन जैसे देशों में तबाही मचाये हुए है। नार्थ वियानामी सेना के सैगोन घुसते ही 1965 में अमरीकी सैनिक टुकड़ियाँ कम्युनिस्ट विरोध में कूद पड़ी। आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैण्ड, दक्षिण कोरिया और थाईलैण्ड की सेनाएँ वियतनाम की मदद में आ गयीं। लेकिन अचरज की बात, इस युद्ध में वियतनाम कम्युनिस्ट देश पड़ोसी चीन और सोवियत संघ वियतनाम की मदद के लिए सामने नहीं आये। कहा कि वे इस शीत युद्ध में भाग नहीं लेंगे। उत्तरी और दक्षिणी वियतनाम 1975 में एक हो गये और दोनों ने मिल कर सोशलिस्ट रिपब्लिक ऑफ वियतनाम के रूप सम्प्रभु देश का रूप ग्रहण किया। अमरीका–वियतनाम का पूरे 20 साल लड़ा गया युद्ध एक ऐतिहासिक मिसाल है जिसमें अमरीका बुरी तरह पराजित हुआ। एक अध्ययन के मुताबिक अमरीकी वियतनाम युद्ध में द्वितीय विश्व युद्ध से कई गुना ज्यादा लगभग 30 लाख टन विध्वंशक बमों का इस्तेमाल हुआ। वियतनामी सैनिकों ने अमरीका के 4000 लड़ाकू जहाजों (फाइटर जेट्स) को मार गिराया। इस युद्ध में 20 से 25 लाख सैनिक मारे गये जिनमें 70 से 80 हजार अमरीकी सैनिक मारे गये। यह दुनिया के इतिहास में सबसे लम्बी अवधि तक लड़ा जाने वाला युद्ध कहा जाता है।

हमारी इस यात्रा का पहला पड़ाव वियतनाम की राजधानी हनोई शहर ही था। यह उत्तरी वियतनाम का एक खुबसूरत शहर है जो वियतनाम की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, पुरातात्विक विरासत के साथ–साथ औपनिवेशिक मुक्ति संग्राम और अमरीकी युद्ध की शौर्यगाथाओं का गौरव को संजोये हुए है। प्राकृतिक सौन्दर्य तो वियतनाम के चप्पे–चप्पे को आकर्षक और मोहक बनाता है। हनोई अपने अतीत और आधुनिक समय का अनूठा समन्वय समेटे वियतनाम का इतिहास स्तम्भ है। यहाँ खुबसूरत फ्रांसिसी और चीनी वास्तुशिल्प की पुरानी इमारतें अतीत से वर्तमान के सफर की कहानी बयाँ करती है। हनोई शहर में विशाल चैड़े आकार में बहती लाल नदी (सैंग सांग) जो चीन से वियतनाम आती है, हनोई के सौन्दर्य में चार चाँद लगाती है। रात में इसमें तैरती फेरीज और रौशनी से सजे जगमग करते क्रूज जिसमें संगीत की ताल पर थिरकते स्त्री–पुरुष–बच्चे खास कर युवा पीढ़ी जिन्दगी का हर पल पूरी जिन्दादिली से जीने का जोश भरते हैं। हर शहर का पुराना और नया चेहरा भी होता है, जैसे पुराना लखनऊ चैक इलाके में खींच ले जाता है। इसी तरह पुराना हनोई शहर वियतनाम के मूल चेहरे को प्रस्तुत करता है जहाँ सँकरी गलियों में लोकल पकवान और जरूरी सामान लिए फेरी वाले ऊँची आवाज लगा कर सामान बेंचते हुए अपनी स्थानीयता का गौरवमयी परिचय देते नजर आते हैं। हनोई शहर का एक बेहद महत्वपूर्ण इलाका है हो ची मिन्ह मुसोलियम कम्प्लेक्स। यहाँ लेनिन, स्टालिन और माओ त्से तुंग की तरह वियतनाम के राष्ट्रपिता हो ची मिन्ह के शव को एक शीशे के शोकेस में संरक्षित कर रखा गया है जहाँ देश–विदेश के हजारों दर्शक हर रोज उनके दर्शन करने और उन्हें श्रद्धांजली देने आते हैं। वियतनामी नागरिकों की अपने राष्ट्र नायक के प्रति निष्ठा और सम्मान को देख कर उनके राष्ट्रीय चरित्र का पता चलता है। हो चि मिन्ह का निधन 1969 में हो गया था। लेकिन अमरीकी युद्ध को वियतनाम की सेना और नागरिकों हो ची मिन्ह की देश भक्ति और राष्ट्रीय प्रेरणा के नेतृत्व में लड़ा और अमरीकी साम्राज्यवाद के परखचे उड़ा दिये। वियतनाम का हर नागरिक हो ची मिन्ह में तब्दील हो गया था। वही प्रेरणा शक्ति आज आधुनिक वियतनाम के निर्माण शक्ति के रूप हर नागरिक के आत्मविश्वास से भरी मुस्कराहट और खुशमिजाजी में झलकती है। उनकी खुशमिजाजी उनकी संघर्षशीलता और पारस्परिक सदभाव का सूचक है। हनोई के इसी इलाके में दुनिया के देशों के दूतावास हैं। हनोई के इस इलाके में वीमेन वार मेमोरियल ने हम सबको चैकाया और विस्मित भी किया। यह स्मारक अमेरकी युद्ध में शहादत देने वाली महिला सैनिकों की शौर्य गाथाओं का अनूठा संग्रहालय है। स्त्रियों के प्रति यह देश बराबरी का स्तर तो स्वीकारता ही है, इसके साथ उन्हें विशेष सम्मान का दर्जा भी देता है। वियतनाम की महिला सैनिकों ने अमरीका के खिलाफ जिस जोश खरोस और बहादुरी से युद्ध लड़ा वह वैश्विक इतिहास में एक अलग उल्लेखनीय अध्याय है। वियतनाम में राष्ट्रीय दिवस 02 सितम्बर को मनाया जाता है। हनोई शहर की 1000वीं सालगिरह विगत 2010 में मनायी गयी थी। हनोई शहर के आसपास ग्रामीण इलाकों में हैण्डीक्राफ्ट गाँवों में हस्तशिल्प फलफूल रहा है। यहाँ बाँस के धागों से बने कपड़े बहुत लोकप्रिय है जिनका निर्यात भी किया जाता है। यहाँ का फुआंग नेशनल पार्क अपने हजारों साल पुराने दरख्तों के लिए मशहूर है। इस पार्क में गिब्बन लंगूरों की तमाम प्रजातियों को संरक्षित और पुनर्वासित किया जाता है। यहाँ एक नदी है नगो डांग जिसमें जिसमें दो गुफाएँ हैं। नदी में छोटी छोटी नावों पर घूमते हुए उन गुफाओं में होते हुए गुजरना जहाँ गहन अँधेरा होता है पर बिजली की रोशनी का उपयुक्त बन्दोबस्त होने के कारण बहुत रोमांटिक लगता है। स्थानीय नाविकों के साथ आठ नौ किमी के इस नौका विहार का अपना ही मजा है जो एक दुर्लभ उपलब्धि जैसी है। इसे टॉम कॉक नौका भ्रमण कहते हैं जो दोनों गुफाओं के नाम पर है। वियतनाम के हेलोंग की खाड़ी की गुफाएँ जो यूनेस्को विश्व धरोहर में शामिल हैं, दक्षिण अफ्रीका की गुफाओं से काफी मेल खाती हैं।

वियतनाम उत्तरी, मध्य और दक्षिणी वियतनाम क्षेत्रों में विभाजित है। उत्तरी क्षेत्र, उत्तरी पूर्वी एवं उत्तरी पश्चिमी क्षेत्रों में विभाजित है। इसी तरह दक्षिणी क्षेत्र भी दक्षिणी पूर्वी एवं दक्षिणी पश्चिमी वियतनाम में विभाजित है। पूरे देश में 34 प्रान्त हैं और ग्रामीण जनपदों, शहरी जनपदों, म्युनिसिपिलिटीज जैसी लगभग 700 इकाइयों में विभाजित हैं जो स्थानीय चुनी हुई प्रशासनिक इकाइयों द्वरा संचालित होती है। यहाँ नागरिकों के लिए शिक्षा और मेडिकल की सुविधाएँ निशुल्क हैं। बेरोजगारी और अपराध लगभग नगण्य हैं। मैनुफैक्चरिंग में वियतनाम ने अप्रत्याशित तरक्की की है जिसमें मेहनतकश नागरिकों की अहम् भूमिका है। दक्षिण कोरिया की बड़ी औद्योगिक इकाइयाँ, जैसे–– सैमसंग और हुण्डई वियतनाम में ही हैं। टेक्सटाइल, चावल, कॉफी, काली मिर्च और फलों के उत्पादन और निर्यात में वियतनाम काफी आगे है। शिक्षा के क्षेत्र में उच्च शिक्षा और तकनीकी शोध में सरकार का खासा निवेश है। नैसर्गिक सौन्दर्य, वास्तुशिल्प एवं ग्रामीण पारम्परिक हैण्डीक्राफ्ट, फिशिंग वियतनाम के पर्यटन को समृद्ध कर राजस्व का बड़ा स्रोत बनता है जहाँ 18 से 20 लाख विदेशी पर्यटक प्रति वर्ष आते हैं। यहाँ हनोई, डनांग, हेलोंग, दलात, हो चि मिन्ह जैसे अनेक बड़े शहर हैं जो पर्यटन, उद्योग, व्यापार, शिक्षा केन्द्रों, बड़े पार्काे, झीलों, समुद्री तटों के सौन्दर्य एवं बाना हिल्स और घने जंगलों से ढकी पहाड़ियों का प्राकृतिक सौन्दर्य पर्यटकों को लुभाता है। उत्तरी पश्चिमी वियतनाम में सैकड़ों वर्ग किमी में फैली हेलोंग की खाड़ी के चमकते सूरज की किरणों की झिलमिलाहट और हिलोरें मारता पारदर्शी पानी पर हरियाली से आच्छादित तैरती पहाड़ियाँ प्राकृतिक सौन्दर्य का जादू सा रचती हैं। चूने के पहाड़ों में लम्बी लम्बी रंगीन गुफाएँ अचरज से भर देती हैं। इनमे अधिकांश गुफाओं की खोज 1920 में या इसके बाद हुई, जैसे भारत में अजन्ता, एलोरा, मोहन जोदड़ो ( सिंध घाटी की सभ्यता) की खोज 19वीं एवं 20वीं शताब्दी में हुई। हेलोंग खाड़ी और उनकी पहाड़ियों को 1995 में विश्व धरोहर में शामिल किया। खाड़ी के तट पर बसा हेलोंग शहर वियतनाम के पर्यटन की दुनिया का चमकता सितारा (शाइनिंग स्टार) है।

इसी इलाके में एक “कैट बा” खुबसूरत आई लैण्ड है जिसके आधे हिस्से को 1986 में राष्ट्रीय पार्क के रूप संरक्षित किया गया है ताकि यहाँ के खुबसूरत जंगलों, चूने की विविध रंगों की गुफाओं, झीलों, समुद्र तटों और वन्य जीवों को सुरक्षित रखा जा सके। उत्तरी वियतनाम का यह राष्ट्रीय पार्क जुरासिक पार्क की तरह 20–25 वर्ग किमी क्षेत्रफल में फैला हुआ है। यहाँ ट्रेकिंग के लिए खुबसूरत 10 से 20 किमी लम्बे ट्रेक्स हैं। सुनहरे बालों वाले लंगूर इस पार्क को और भी रोमांचित करते हैं। यहाँ की पहाड़ियों में चूने की विविध रंग की गुफाएँ दक्षिणी अफ्रीकी गुफाओं की याद दिलाते हैं जहाँ गुफाओं की छतों से पिघली हुई मोमबत्तियों की तरह विविध रंगों की स्वाभाविक तरह से निर्मित लटकती चूने की लटाएँ अपने अचरज भरे सौन्दर्य से विस्मित कराती हैं। तब अपने बड़े भाई अमरीकी भारतीय डा– रंजीत सिंह का चिरस्मरणीय कथन याद आता है “दिस वर्ल्ड इज अ ब्यूटीफुल प्लेस”। अमरीकी वियतनाम युद्ध में ये घने जंगल वियतनामी सैनिकों के लिए ढाल बन कर खड़े थे जिसमें सैनिक छिप जाते थे। यहाँ का हैफोंग शहर घनी आबादी वाला वियतनाम का तीसरा बड़ा शहर जो अपने खुबसूरत समुद्री तटों, बन्दरगाह और औद्योगिक उत्पादन के लिए जाना जाता है। इसी शहर में तीसरी शताब्दी में निर्मित डू हैंग पगोडा यानी बुद्धिस्ट स्मारक जहाँ का प्राचीन वास्तुशिल्प और नैसर्गिक सौन्दर्य एक गहरे सुकून का अहसास कराता है। पूरे दक्षिणी पूर्व एशिया के देशों में बुद्ध दर्शन और उनके चिन्तन का प्रभाव पूरे समाज और उनके राषट्रीय चरित्र के निर्माण में अहम् भूमिका निभाता है जिसके आधारभूत स्तम्भ हैं, करुणा, मैत्री, शील, मानवीय गरिमा का सम्मान, कर्तव्यपरायणता और देश भक्ति। मैंने लगभग इन सभी देशों को अपनी यात्राओं के माध्यम से गहराई से जाना और समझा है। इसी तरह उत्तरी पश्चिमी वियतनाम में “बा बे” नेशनल पार्क है जो अपनी ऊँची–ऊँची पहाड़ियों, गहरी नदियों, खुबसूरत झरनों और घने जंगलों के लिए जाना जाता है। वियतनाम ने अपनी प्राकृतिक सम्पदा जैसे जंगल, पहाड़ियों, नदियों, समुद्र तटों और झीलों को संरक्षित करने के लिए इन्हें नेशनल पार्कों में तब्दील कर दिया है। हम वियतनाम को पार्कों का देश भी कह सकते हैं। यह कितनी खुबसूरत सोच है जब कोई देश अपनी आर्थिक समृद्धि के साथ–साथ उसके नैसर्गिक सौन्दर्य और उसके संरक्षण को उतना ही महत्व देता है जितना देश की जीडीपी को ताकि देश खुबसूरत और जीवन्त भी दिखे, खिले हुए वसन्त की तरह। इस सोच में राष्ट्रीय नीतियों और देश के नागरिकों की बराबर की भूमिका है क्योंकि नीतियों का निर्माण जमीनी स्तर पर नागरिक खुद करते हैं जिन्हें संवैधानिक रूप देने का काम नेशनल एसेम्बली करती है।

यहाँ हनोई से सटा एक चाऊ गाँव है जहाँ पहाड़ी आदिवासी लोग रहते हैं। ग्रामीण भ्रमण के लिहाज से इस गाँव की देखना रोमांचित करता है। इस गाँव में रहने वाले लोग थाईलैण्ड, लाओस और चीन की प्राचीन पृष्ठभूमि के आदिवासी नागरिक हैं। धान के लहलाते खेतों में छातेदार कोनिकल हैट लगाये काम करते स्त्री–पुरुष किसान मन को मोह लेते है जब वे अपनी कमर सीधी कर अभिवादन की मुद्रा में मुस्कराते हुए हाथ हिलाते हैं। यहाँ के स्थानीय लोग हस्तशिल्प और हाथ के बुने सूत के कपड़े अपने घरों में बेंचते है जिसे टूरिस्ट अपनी यादगार धरोहर के रूप में खरीदते हैं। यहाँ बाँस के धागों और रेशम के कपड़े खूब बिकते हैं। रेशम भारत, चीन और वियतनाम से दुनिया भर में निर्यात होता है। इसी उत्तरी वियतनाम इलाके में लाओ काई नाम का छोटा सा शहर है जो चीन की सीमा से लगा है। इसे चीन का प्रवेश द्वार भी कहा जाता है। 1979 में चीनी आक्रमण के पहले वियतनाम रेलमार्ग से चीन से जुड़ा था। लाओ काई शहर हनोई और सापा के बीच ट्रेन से भ्रमण करने वाले भ्रमणार्थियों का बड़ा हब (केन्द्रक) है। लाओ काई हनोई से लगभग 350 किमी है। भ्रमणार्थियों के लिए रेल के सफर के अनुभव के लिहाज से एक अच्छा अवसर प्रदान करता है। उत्तरी पश्चिमी वियतनाम के इस इलाके में एक छोटा सा खुबसूरत फ्रेंच हिल स्टेशन है जिसे फ्रांसीसियों ने अपने औपनिवेशिक शासनकाल 1909 में स्थापित किया था। यहाँ होआंग पर्वत पर वियतनाम की सबसे ऊँची 3143 मीटर यानी लगभग 10000 फुट ऊँची पर्वतीय चोटी है। इसे पैदल ट्रेकिंग में लगभग चार–पाँच दिन लगते हैं। मुझे स्विट्जरलैण्ड और नार्वे की तरह यहाँ ट्रेकिंग का लालच मन में आया पर ग्रुप टूर में यह सम्भव नहीं हो सका। मैंने अपने देश भारत में पिण्डारी ग्लेसियर, कैलाश मानसरोवर जैसी अनेक लम्बी लम्बी ऊँची चढ़ाई की महीनों चलने वाली ट्रेकिंग की हैं जिसके खतरों से भरे रोमांचक अनुभव अभी भी गुदगुदाते और डराते हैं। स्वीटजरलैण्ड को धरती का स्वर्ग कहते हैं। बेशक उसका पर्वतीय और हरियाली से भरे मैदानों का प्राकृतिक सौन्दर्य और कलकल बहती नदियों का संगीत बेहद मोहक और मदहोश करने वाला है। सौभाग्य से मुझे यह नयन सुख भोगने का अवसर मिला। मैंने दो तीन दिन स्विट्जरलैण्ड के सौन्दर्य के मोहपाश में यादगार पलों के रूप में जिये। पर अब जब मैंने दुनिया की इस धरती का एक बड़े हिस्से को अपनी धरती अपना आकाश के रूप में जी लिया है तब मैं दावे के साथ कह सकता हूँ कि दुनिया के हर देश में अपने अपने तरह के स्विटजरलैण्ड्स हैं। यह अनुभूति मुझे वियतनाम की पहाड़ियों, झीलों, झरनों, समुद्र तटों और ग्रामीण इलाकों को घूमते हुए हुई।

मध्य वियतनाम का शहर डनांग वियतनाम का तीसरा सबसे बड़े शहरों में है। हम लोग हनोई से डनांग घरेलू उड़ान से पहुँचे। यह लगभग डेढ़ घंटे का यही कोई 700–800 किमी हवाई सफर था। यह शहर प्राचीन वियतनाम की आध्यात्मिक राजधानी रहा है। यह शहर अपने खुबसूरत समुद्र तटों, बौद्ध स्मारकों, वन्यजीवों और घने वनों के कारण भ्रमणार्थियों के लिए आकर्षण का केन्द्र है। यहाँ बाना हिल्स एक बहुत ही खुबसूरत नैसर्गिक सौन्दर्य और तमाम विस्मित करने एवं चैकाने वाले दर्शनीय स्थलों का गुलदस्ता है जिसमें तेज ठण्डी हवाओं के बीच उड़ते दोपट्टो और जुल्फों के मोहक भीड़–भाड़ में हाथों में हाथ डाले लगभग आधा किमी गोल्डन ब्रिज पर घूमना और प्राकृतिक सौन्दर्य की रौनक से भरी नदी, पहाड़ों और घने हरेभरे जंगल को का नजारा धरती को जन्नत बनाता है। इस पुल की खास बात है कि पहाड़ों को काट कर दो इनसानी हाथों द्वारा रोका गया। इससे लगता इस पुल को खम्भें नहीं बल्कि इनसानी हाथ थामे हुए हैं और यह पूरे लम्बे पुल में पाँच–छ: जगह किया गया है। इसके बाद पुल पार करते हुए पहाड़ काट कर इनसानी मूर्तियाँ बनायी गयी हैं जो एक दूसरे का हाथ पकड़े मुस्कराते खड़े हैं। इस पूरे परिदृश्य के जरिये यह दिखाने की कोशिश की गयी है कि यह दुनिया किसी दैवी शक्ति द्वारा नहीं, बल्कि हाड़ मांस के इनसानों द्वारा रची गयी है। वहाँ पर्यटकों की भीड़ का नजारा बेहद अचम्भित मोहक लग रहा था। इस जगह पर पहुँचने के लिए हमें 17 किमी के केबिल कार से सफर करना पड़ता है जो दुनिया का सबसे लम्बा केबिल कार रूट (मार्ग) है और जो मुश्किल से 15–20 मिनट में कवर होता है। इसे अमरीकी युद्ध में विजय हासिल करने के बाद किसी विशेषज्ञ फ्रांसीसी इंजीनियर और शिल्पकारों द्वारा बनवाया गया जिसमें बुर्ज खलीफा की लाखों बिलियन डॉलर कर खर्च आया। इसे फ्रेंच विलेज बाना हिल भी कहा जाता है। एक विस्तृत क्षेत्र में फैले इस पैराडाइज में घूमते हुए किसी फ्रांसिसी पुरानी बस्ती में होने की अनुभूति होती है यहाँ विविध सांस्कृतिक एक्टविटीज के लिए थियेटर, रात में रुकने के लिए अच्छे होटल्स और रेस्तराँ भी हैं। यह पूरा रोमेंटिक बाना हिल्स अर्थ, मून, सन तीन किंगडम में विभाजित है। मून किंगडम में एक्लिप्स प्लाजा और लूनर केसल्स के वास्तुशिल्प फ्लोरेंस, वेनिस और पेरिस की याद तजा करते हैं। सन किंगडम में हेलिओज वाटर फाल और फ्रेंच विलेज मध्यकालीन यूरोप की झलक पेश करते हैं। यहाँ मून और सन फेस्टिवल्स होते हैं जिनमें देशी–विदेशी पर्यटकों की अपार भीड़ जुटती है। लगभग 1500 मीटर ऊँचाई पर बसायी गयी यह इनसानी जन्नत वियतनामी नागरिकों और सरकार के पराक्रम का एक खूबसूरत स्मारक है। इसे वियतनाम का डिजनीलैण्ड भी कहते हैं। वियतनामी नागरिक युद्ध जीतने और स्वप्निल दुनिया रचने दोनों में बराबर की दिलचस्पी रखते हैं। काश इस छोटे से प्यारे से पड़ोसी वियतनाम से हम भी कुछ सीख सकें। हम कोई दूसरा ताजमहल नहीं बना सकते तो मन्दिर–मस्जिद की नफरती राजनीति से इतर कुछ तो कर ही सकते हैं। उसके जैसा कुछ और तो कर ही सकते हैं।

चीन की तरह वियतनाम भी अपने प्राकृतिक संसाधनों, स्रोतों, सम्पदाओं पर लगातार खोजें और अनुसंधान कराता रहता है। यह काम विश्विद्यालयों और विशेशज्ञ संस्थानों के माध्यम से कराया जाता है। इसीलिए तमाम आइलैण्ड्स की गुफाओं और प्राकृतिक सम्पदाओं की खोज वियतनाम में उन्नीसवीं और बीसवीं शताब्दी में हुर्इं। इसे मध्य वियतनाम का आर्थिक शक्ति केन्द्र भी कहा जाता है। यहाँ प्राचीन एवं औपनिवेशिक काल की वास्तुकला को दर्शाती इमारतें वियतनाम की गौरवमयी विरासत को संजोये हुए हैं। चैम राजवंश काल की पत्थरों पर उकेरी मूर्ति कला यहाँ के संग्रहालयों में दर्शकों को मुग्ध करती है। डनांग अमरीकी वियतनाम युद्ध का एक बड़ा केन्द्र रहा है इसलिए यहाँ युद्धकाल के अवशेषों को संग्रहालयों में संरक्षित कर वियतनामी सेना की शौर्यगाथा और देश भक्ति के गौरव को संजो कर रखा गया है जिसे देखने लाखों की संख्या में देशी–विदेशी आते हैं। यहाँ मार्बल पत्थरों की ऊँची ऊँची पहाड़ियाँ और मोम की तरह पिघले पत्थरों की लटकती विविध रंगों की लटों वाली गुफाएँ बहुत हैं जो एक अलग तरह के अचरज भरे सौन्दर्य से मुग्ध करती हैं। यहाँ 30 किमी क्षेत्रफल में फैले समुद्री क्षेत्र (दक्षिणी चीन सागर) में खुबसूरत और भीड़–भाड़ वाले समुद्री तटों (बीचेज) को देखना और समुद्री लहरों को छूना सुखद अनुभव देता है। हमारे सभी साथियों ने इसका खूब लुत्फ लिया जिसमें महिलाएँ और उनकी दो युवा बेटियों का धमाल तो कमाल का रहा। फोन कैमरे अपनी जिम्मेदारी के तहत इन सुखद पलों को अनमोल मोतियों के रूप में बटोरने में अपनी भूमिका बखूबी निभा रहे थे। यहाँ चाइना बीच के ठीक सामने खुबसूरत मार्बल का पहाड़ सौन्दर्य का एक अनूठा संगम है जो दक्षिणी अफ्रीका के केप टाउन में देखने को मिलता है। यहाँ होई एन एक ऐसा क्षेत्र हैं जहाँ चीनी, जापानी, यूरोपियन और प्राचीन वियतनामी वास्तुशिल्प का दिग्दर्शन होता है और स्थानीय सभ्यता में इन सभी सभ्यताओं का खुबसूरत मिश्रण देखने को मिलता है। अगर हम थोड़ा गम्भीर होकर सोचें तो इस धरती पर मनुष्य स्वभाव से कास्मोपोलिटन यानी वैश्विक नागरिक होता है। पूरी मानव जाति का धरती पर फैलाव एक जगह से ही तो हुआ है अफीका से। अगर दुनिया के सभी नागरिकों को दो नागरिकताएँ दे दी जाएँ एक खुद के देश की और एक वैश्विक तो भौगोलिक सीमाएँ ढीली पड़ जायेंगी और युद्ध की सम्भावनाएँ भी क्षीण हो जाएँगी। वैश्विक जीडीपी का 25 से 30 फीसदी हिस्सा जो हथियारों और ड्रग्स के उत्पादन पर खर्च होता है, जनकल्याण और जरूरी जनसुविधाओं के विकास पर खर्च होगा। दुनिया के सभी नागरिकों को दुनिया के देशों में कम से कम अपने देश के आसपास और पड़ोसी देशों में घूमना अनिवार्य कर दिया जाय जिसके प्रोत्साहन के लिए सरकारें आर्थिक सहयोग भी दें तो पारस्परिक साझेदारी, सदभाव, वैश्विक बन्धुत्व और तमाम तकनीकी, कृषि सम्बन्धी एवं सामजिक जरूरी जानकारियों में इजाफा होगा और हमारे सोच का दायरा बढ़ेगा और सोच की संकीर्णताएँ ध्वस्त होंगी।

इसी क्षेत्र में पुराने पारम्परिक वियतनाम की झलक पेश करता होई आन शहरी और ग्रामीण इलाका चीनी, जापानी, वियतनामी और फ्रांसिसी संस्कृति और वास्तुकला का खुबसूरत नमूना है। इस देश की एक खास विशेषता है कि इसने अपने इतिहास के हर अच्छे–बुरे पहलुओं को संजो कर रखा है। उन्हें नकारात्मक समझ कर नष्ट नहीं किया है। यह उनके राष्ट्रीय चरित्र के ईमानदार पक्ष और इतिहास से सीखने के नजरिये को दर्शाता है। यहीं पर माय सन नाम का यूनेस्को की विश्व धरोहर में शामिल प्राचीन चैम राजवंश की विरासत को संजोये छोटा सा शहर है। यहाँ खुबसूरत पहाड़ियों और प्रवाहमान जल धाराओं के बीच प्राचीन बौद्ध मन्दिर हैं। वियतनाम के दक्षिण मध्य क्षेत्र में बहुत कुछ देखने को है। यहाँ नाह ट्रांग एक खुबसूरत समुद्र तटों (बीचेज) का शहर है जिसे वियतनाम की बीच कैपिटल कहा जाता है। वियतनाम की सबसे खास बात है उसका पूर्ण रूप से अनौपचारिक होना। शहर हों या गाँव उसे मूल रूप में पेश करने में विश्वास रखते हैं। उनका मानना है कि मनुष्य हो या प्रकृति उसका असल सौन्दर्य उसके मूल रूप में ही है। वे कुछ भी छिपाते नहीं हैं। निरन्तर बेहतरी के लिए कोशिश और जो सार्वजनिक हित में जरूरी है उसे हासिल करना उनका ध्येय रहता है। यह निश्छलता उनके राष्ट्रीय चरित्र की उल्लेखनीय विशेषता भी है। वियतनाम के चप्पे–चप्पे में पहाड़, नदियाँ, खाड़ियाँ, समुद्र और आइलैण्ड्स एक दूसरे का दामन नहीं छोड़ते। सब हाथों में हाथ डाल कर साथ–साथ चलते हैं–– हँसते–गाते, कूदते–उछलते। यहाँ दुबई की तरह सुनहरी बालू के रेगिस्तान में ऊँचे नीचे पहाड़ियों के बीच खुबसूरत नीले पानी की झिलमिल करती झीलें भी देखीं जहाँ नावों में घूमना एक खुबसूरत सपने जैसा है। स्थानीय नागरिक नावों में अपनी अपनी वंशी लिए मछलियाँ पकड़ते बड़े मोहक लगते हैं। इसे वियतनाम का डिजनीलैण्ड भी कहते हैं। यहाँ ऊँची पहाड़ी पर लॉग सन पगोडा (बुद्ध मन्दिर) है जहाँ केबिल कार से या फिर सैकड़ों सीढियाँ चढ़ कर पैदल जाना होता है। यह बुद्ध सन्यासियों का निवास स्थान भी है। यहाँ विविध रंगों की ग्रेनाईट पहाड़ियाँ अपनी अलग ही छटा बिखेरती हैं। यहाँ समुद्री जानकारियों और समुद्री परिर्द्श्यों से सुसज्जित खुबसूरत संग्रहालय भी है और समुद्र की सतहों की गहराई नापने वालों के डाइविंग साइट्स हैं। यहाँ का “मुई ने” बीच पर्यटकों को बहुत लुभाता है जहाँ समुद्र के साथ–साथ सफेद बालू की पहाड़ियाँ भी हैं। इसे वियतनाम का सहारा डेजर्ट भी कहते हैं। इस बीच का क्रूज से भ्रमण एक अलग ही सुखद अनुभूति का लुत्फ देती है।

मध्य वियतनाम में यहाँ का दक्षिणी क्षेत्र आता है। यह क्षेत्र ऊँची–ऊँची पहाड़ियों, झीलों, झरनों और कल–कल बहती नदियों के नैसर्गिक सौन्दर्य का अद्भुत खजाना है। यह क्षेत्र अपेक्षाकृत ठण्डा है। यहाँ जन जातियों के पारस्परिक टकराव के छुटपुट आन्दोलन चलते रहते हैं। इसलिए बीच–बीच में यह क्षेत्र प्रतिबंधित भी रहा है। पर अब ऐसा कुछ नहीं है। यह क्षेत्र एडवेंचरस यात्राओं का क्षेत्र भी है जहाँ ट्रेकिंग के लिए ऊँची–ऊँची पहाड़ियों पर 15 से 20 किमी लम्बे ट्रेक्स हैं। दलात शहर इस क्षेत्र का मुख्य आकर्षण है जो हनोई और हो चि मिन्ह शहर की तरह वियतनाम का एक बड़ा शहर है। इस शहर में हांग ना क्रेजी हाउस अपनी विचित्र टेढ़ी मेढ़ी और गहरी गुफाओं और ऊँची पहाड़ियों को देखना और उनमें घुसना और चढ़ना अचम्भित करता है। लकड़ी और पत्थरों पर उकेरी गयी आकृतियाँ अपनी कलात्मक भव्यता से दर्शकों को अचम्भित और आह्लादित करती हैं। इसे वासन्ती शहर भी कहते हैं जो झरनों और झीलों के खुबसूरत नैसर्गिक सौन्दर्य से आच्छादित है। यहाँ लांग बियान पर्वत की तलहटी में नौ छोटे–छोटे गाँवों का आदिवासियों का लैट ग्रामीण क्षेत्र है जो अपनी मूल जीवन शैली और सांस्कृतिक झलक देखने की दृष्टि महत्वपूर्ण है।

कभी दक्षिणी वियतनाम की राजधानी रहा सैगोन शहर जिसे अब हो चि मिन्ह सिटी कहते हैं आधुनिक वियतनाम की व्यापारिक और आर्थिक राजधानी कहा जाता है। यह क्षेत्रफल और जनसंख्या के लिहाज से सबसे बड़ा, व्यस्त और जीवन्त शहर है। इसे वियतनाम का टोक्यो, न्यूयार्क, संघाई, लन्दन और पेरिस कह सकते हैं। लगभग 20–25 साल अमरीकी युद्ध और इसके पहले फ्रांसिसी और जापानी उपनिवेशवाद से मुक्ति की लड़ाई लड़ते हुए आज एक आधुनिक विकसित सोशलिस्ट रिपब्लिक वियतनाम हमारे सामने साहस, कठिन परिश्रम और राष्ट्र निर्माण की उत्कट आकांक्षा के रूप में अपने राष्ट्रीय चरित्र की तस्वीर लिए अचम्भित करता खड़ा है। हो चि मिन्ह सिटी का नामकरण यहाँ के कम्युनिस्ट नायक के नाम पर किया गया जिन्हें वियतनाम का राष्ट्रपिता कहा जाता है। अपनी सादगी और सच के मार्ग के अडिग राही इस मार्क्सिस्ट मजदूर नेता को वियतनाम का गाँधी कहते हैं। जगह–जगह गाँधी और हो चि मिन्ह की साथ–साथ तस्वीरें भारत और वियतनाम की मजबूत दोस्ती के रिश्ते को दर्शाती हैं। यहाँ पुराना वास्तुशिल्प आज भी अतीत के संघर्ष का दर्पण है और आधुनिक ऊँची–ऊँची इमारतें, सुसज्जित बड़े–बड़े मॉल, मेट्रो और औद्योगिक विकास वियतनामी नागरिकों के उत्साह, कौशल और हाड़–तोड़ मेहनत का परचम लहराता खड़ा है। यहाँ उत्तरी और दक्षिणी वियतनाम के एकीकरण की याद में 1996 में निर्मित रियूनिफिकेशन पैलेस है जो प्रेसिडेंशल पैलेस भी है। कहा जाता है कि 30 अप्रैल 1975 को जब उत्तरी वियतनाम का पहला टैंक सैगोन में घुसा तो इतिहास ने पूँजीवाद का समाजवाद के सामने समर्पण दर्ज किया और यह पैलेस समाजवाद की विजय के उस ऐतिहासिक क्षण का शानदार स्मारक है। यह अमरीका– वियतनामी युद्ध की विभीषिका को दर्शाता है।

वियतनाम के राष्ट्रीय ध्वज का लाल रंग क्रांति और मुक्ति संघर्ष में नागरिकों के बहे खून का प्रतीक है। झण्डे के बीच में सुनहरा सितारा राष्ट्रीय एकता की आत्मा का प्रतीक है। सितारे की पाँच किरणें देश के मजदूरों, किसानों, सैनिक बुद्धिजीवियों (साहित्यकार, लेखक, कवि, रंगकर्मी, चित्रकार, मूर्तिकार, फिल्मकार, पत्रकार, संगीतकार, लोकगायक, लोक साहित्यकार आदि), व्यवसायियों के प्रति सम्मान का प्रतीक है। यह प्रमाणित करता है देश लोगों की सामूहिक एकजुटता और उनकी गरिमा ही असल देश होता। वियतनाम के राष्ट्र गान को मार्च सॉंग भी कहते हैं। इसे 1944 में वान काओ ने लिखा और 1946 में राष्ट्र द्वारा अंगीकार किया गया। यह प्रेरणादायक देश भक्ति मार्च गीत है जो नागरिकों में जोश और कर्तव्यबोध जगाता है। वियतनाम की साक्षरता दर 96 फीसदी है। वियातनाम अपने नैसर्गिक सौन्दर्य, सामाजिक सुरक्षा के कारण पर्यटकों के लिए आकर्षण का केन्द्र है। यहाँ अपराधदर बहुत नीचे है इसीलिए 20 लाख से ज्यादा टूरिस्ट इस उत्तर प्रदेश से भी छोटे देश में प्रति वर्ष आते हैं। पर्यटन यहाँ राजस्व का एक महत्वपूर्ण स्रोत है। यहाँ बेरोजगारी दर भी बहुत नीचे है एक फीसदी के लगभग। यह मेहनतकशों का देश है। कृषि क्षेत्र भारत की तरह रोजगार का यहाँ एक बड़ा क्षेत्र है। इसके अतिरिक्त उद्योग, व्यवसाय और लघु उद्योग के जरिये वियतनाम मैनीफैक्चिरिंग के क्षेत्र में बहुत आगे है। निर्यात के जरिये वियतनाम खासी आय देश के लिए अर्जित करता है। यहाँ प्रति व्यक्ति आय 5000 डॉलर से अधिक है जो भारत की प्रति व्यक्ति आय से दूनी है। जबकि वियतनाम जनसंख्या, क्षेत्रफल और प्राकृतिक संसाधनों की दृष्टि से भारत का 15वाँ हिस्सा भी नहीं है। चार ट्रिलियन पाँच ट्रिलियन का झूठा ढोल पीट कर सरकार देश की जनता को लगातार गुमराह कर रही है। वियतनाम तेजी से बढ़ती मिश्रित समाजवादी अर्थव्यवस्था है। यह छोटा सा देश प्रति व्यक्ति क्रय शक्ति के लिहाज से दुनिया की 21वीं बड़ी अर्थव्यवस्था है। वियतनाम आसियान एवं अपेक संगठनों का सदस्य भी है। वियतनाम लगभग 8 फीसदी जीडीपी के साथ 514 बिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था है। यह मानव विकास सूचकांक में और भ्रष्टाचार सूचकांक में क्रमश: 93वें एवं 88वें स्थान पर है। यहाँ औसत आय 300 डॉलर प्रतिमाह है। यहाँ कृषि क्षेत्र में 27 फीसदी औद्योगिक क्षेत्र में 34 फीसदी और सेवा क्षेत्र में 39 फीसदी लोग काम करते हैं। वियतनाम जैसा छोटा सा देश लगबग 406 बिलयन डॉलर का निर्यात करता है और इसके निर्यातक भागीदार देशों में अमरीका, चीन, हांगकांग, दक्षिण कोरिया, जापान और अन्य आसियान देश हैं। वियतनाम अपने देश के निर्यात का 30 फीसदी अमरीका को निर्यात करता है। निर्यात सामग्री में मुख्य है इलेक्ट्रोनिक गुड्स, टेक्सटाइल, सीफूड, मशीनरी, काली मिर्च, काफी, चावल, क्रूड आयल, लकड़ी का सामान आदि है, जबकि वियतनाम लगभग 380 बिलियन डॉलर का आयात करता है जिसमें मुख्य हैं पेट्रोलियम, भारी मशीनरी, ऑटो मोबाइल, केमिकल, प्लास्टिक और औद्योगिक कच्चा माल आदि।

वियतनाम जिसे सोशलिस्ट रिपब्लिक ऑफ वियतनाम कहते हैं एक कम्युनिस्ट देश कहलाता है। लेकिन यहाँ सैकड़ों–हजारों साल की परम्पराओं में बौद्ध और ताओ दर्शन घुला हुआ है जिसे एक तरह का प्राचीन धार्मिक प्रभाव भी कह सकते हैं। यहाँ का ल्यूनर नव वर्ष का त्यौहार फरबरी माह में बहुत धूमधाम से मनाया जाता है जिसमें स्थानीय लोकनृत्य, लोकगीत, स्थानीय वाद्य संगीत, और जल कठपुतली नृत्य आदि अनेक पारम्परिक आयोजन होते हैं। वियतनामी निहायत खुशमिजाज और उत्सवधर्मी होते हैं। मेहनत करना और पूरे उत्साह से जिन्दगी जीने को अपना शीर्ष अधिकार और कर्तव्य मानते हैं। कृषिप्रधान देश होने के नाते फसलों के बोने और काटे जाने के उत्सव भारत की तरह होते हैं। यहाँ बौद्ध पगोडा आध्यात्मिक केन्द्र के रूप में बेहद लोकप्रिय हैं। इसलिए हनोई में एक स्तम्भ वाले बुद्ध पगोडा जैसे अनेक बौद्ध आध्यात्मिक केन्द्र हैं। यहाँ के स्थानीय बाजार भी स्थानीय संस्कृति के शो रूम कहे जा सकते हैं। मैं पहले ही बता चुका हूँ कि वियतनामियों के जीवन में बनावटीपन की कोई जगह नहीं है। वे खुलेपन और पारदर्शी जीवन जीने में यकीन रखते हैं। इसलिए जब कोई वियतनामी युवा–युवती अपने पारम्परिक परिधान में गुलाब के एक फूल के साथ दोनों हाथ जोड़ कर आदर और विनम्र भाव से नमस्ते या नमो: बुद्धाय कहते या कहती हैं तो हमारे दिल आनन्द की अनुभूति से विह्वल हो जाते हैं। यहाँ के समाज में 54 से अधिक स्थानीय प्रजातियाँ (एथिनिक ग्रुप) हैं जो अपनी विविधताओं के साथ एकजुटाता के साथ जीते हैं। यहाँ के सामाजिक सांस्कृतिक संग्रहालयों में यह सब जीवन्त देखने को मिलता है। यहाँ के सीढ़ीदार चावल के खेत और कु चि टनल्स स्थानीय ग्रामीण संस्कृति का हिस्सा हैं। इन सुरंगों ने अमरीकी युद्ध के दौरान वियतनामियों के जीवन रेखा का काम किया। इन सुरंगों के बनाने में उनके निर्माण कौशल को भी समझा जा सकता है। यहाँ का होई एन एक पुराना पारम्परिक शहर है जो अपनी लालटेन संस्कृति (लेंटर्नस) के लिए जाना जाता है। विविध तरह की लालटेनों से जगमगाता यह शहर अपने पुराने औजारों से भी कितना लगाव और जुड़ाव रखता है यह एक सुखद अनुभूति देता है। नये का स्वागत और पुराने की यादें साथ–साथ चलें तो सफर की हकीकत याद बनी रहती है। वियतनाम एक बड़ा कौफी उत्पादक देश है जो इसका निर्यात भी करता है। इससे भी बड़ी बात है कौफी बनाने की अनगिनत रेस्पीज और उन्हें पूरे उत्सव का हिस्सा बना कर सिप करने का लुत्फ लेना कोई वियतनामियों से सीखे। यह एक सेरिमोनियल सांस्कृतिक गतिविधि है जैसे जापान ग्रीन टी सेरेमनी। यहाँ 888 का मतलब होता आओ चलो बात करें। यहाँ ड्रेगन फ्रूट की खेती होती है। यहाँ का ड्रेगन डांस और ड्रेगन शो बहुत लोकप्रिय हैं। दलात शहर रात को नदी के पुल पर जगमगाती रोशनी में एक लम्बे से ड्रेगन के मुख से आग की लपटों और पानी के फब्बारों का प्रदर्शन एक अद्भुत दृश्य प्रस्तुत करता है जिसे देखने के लिए देशी–विदेशी नागरिकों की भीड़ जुटती है। वियतनाम के शहर और गाँव की शाम सांस्कृतिक शाम होती है जहाँ संगीत, नदी में सजी–धजी नौकाएँ, विविध व्यंजनों से सजी लोकल फूड की दुकाने और बाजार सुन्दर सांस्कृतिक परिदृश्य की छटा रचते हैं।

वियतनाम में लेखन और साहित्य सृजन का एक लम्बा इतिहास है जो चीनी साहित्य से प्रभावित है। यहाँ का साहित्य उदभव और क्रांति की सशक्त धारा का साहित्य है। यहाँ साहित्य की तीन श्रेणियाँ हैं जैसे “टूयेन साहित्य” पारम्परिक मौखिक और श्रुति साहित्य, “हान वियात” (चीनी– वियतनामी साहित्य) और तीसरा “कचोक आम” (आधुनिक या रोमेंटिक साहित्य)। कई फ्रांसीसी और अंग्रेज लेखक जैसे आन्द्रे मालरो, समरसेट और ग्राहम ग्रीन सैगोन (हो चि मिन्ह सिटी) में रहे हैं और उपन्यास लिखे हैं। “द लवर” फिल्म वियतनाम पर आधारित मर्गाेराईट ड्यूरास के उपन्यास पर आधारित है। प्राचीन साहित्य में लोक कथाएँ और ड्रेगन किवदंतियाँ बहुत चाव से पढ़ी जाती हैं। ड्रेगन राजवंश से जुड़ा साहित्य भी ड्रेगन किवदंतियों का हिस्सा है। सौ गाँठ वाला बाँस एक लम्बी लोक कथा यहाँ के साहित्य का महत्वपूर्ण हिस्सा है जिसमे प्राचीन काल में सामन्ती शोषण और अन्याय का रोचक विवरण मिलता है। का टू सांग पोएट्री 600 साल पुरानी गायन शैली में है जिसे संजो कर रखे हुए हैं।

वियतनाम की यह रोमांचक यात्रा विविध अनुभवों और तमाम अनछुए पहलुओं को जानने, समझने और एक समूह में परवारिक अपनेपन के साथ कुछ दिन जीने का सुखद अनुभव यह बताता है कि घर से बाहर निकलने पर ही अजनबियों के साथ पारस्परिक सम्बन्धों और स्तब्ध कर देने वाले कुदरत के सौन्दर्य की सुखानुभूति सम्भव है। इसलिए निकल पड़िए जिन्दगी के दुर्लभ अनमोल पलों के सुख के मोतियों को यात्रा के महासागर से चुनने के लिए।

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