ब्लॉग

देश-विदेश के इस अंक में

सामाजिक-सांस्कृतिक

चार महीने में चैथी बार : स्मारकों पर हमले का अर्थ

चार महीने में चैथी बार : स्मारकों पर हमले का अर्थ –– राजेन्द्र प्रसाद सिंह स्मारक केवल पत्थर, धातु या सीमेंट से बनी आकृतियाँ नहीं होते। वे किसी समाज की सामूहिक स्मृति के दृश्य प्रतीक होते हैं। इसलिए... आगे पढ़ें


जीवन और कर्म

अली सरदार जाफ़री : इनसानियत और मोहब्बत का शायर

अली सरदार जाफ़री : इनसानियत और मोहब्बत का शायर

सरदार जाफ़री की याद आयी और जे़हन में उनका एक शे’र कौंध गया, हो जाता हूँ शहीद हर अहले–वफ़ा के साथ हर दास्ताने–शौक़ मेरी दास्ताँ है आज जो शख़्स हर प्रेम–कहानी में अपनी दास्ताँ देखे वही सच्चा... आगे पढ़ें

एक दिन सभी मनुष्य समान होंगे

एक दिन सभी मनुष्य समान होंगे

एक दिन सभी मनुष्य समान होंगे (साल 2025, गीतकार–संगीतकार सलिल चैधरी का जन्मशती वर्ष) –– ज़ाहिद ख़ान सलिल चैधरी का नाम लेते ही जे़हन में एक ऐसे संगीतकार का अक्स आता है, जिसके संगीत में पूरब और पश्चिम... आगे पढ़ें


राजनीतिक अर्थशास्त्र

एआई: तकनीक, वर्ग–सत्ता और मानव मुक्ति

तकनीक तटस्थ लग सकती है, हालाँकि उसका सामाजिक उपयोग तटस्थ नहीं है आज सभी उद्योगों और फैक्ट्रियों में मजदूरों की कहानी बड़े त्रासद रूप में सामने आ रही है जब मशीनों की बढ़ती क्षमता इनसान की मुक्ति का नहीं, उसके बेरोजगारी–विस्थापन... आगे पढ़ें

खनन एवं खनिज अधिनियम, 2026 : पूँजीपतियों की लूट का इन्तजाम

बीते 13 और 14 अगस्त को सरकार ने खनन एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2026 लोकसभा और राज्यसभा मे विपक्ष के भारी विरोध के बावजूद ध्वनि मत से पास करा लिया है। इस संशोधन विधेयक के जरिये केन्द्र सरकार ने... आगे पढ़ें

पैक्स सिलिका पहल–– एआई युग में साम्राज्यवाद का नया खेल

11 दिसम्बर 2025 को यूनाइटेड किंगडम, अमरीका, जापान, साउथ कोरिया, सिंगापुर, ऑस्ट्रेलिया और इजराइल ने पैक्स सिलिका परियोजना शुरू की। ये सात संस्थापक देश कहे गये। 12 जनवरी से 31 जुलाई 2026 तक भारत, यूरोपीय संघ, जर्मनी,... आगे पढ़ें


राजनीति

असली परजीवी कौन हैं?

–– आनन्द तेलतुम्बड़े एक ऐसे पेशे के शीर्ष पर विराजमान होकर–– जिसने कभी चावल का एक दाना, एक मीटर कपड़ा या रहने के लिए एक ईंट भी नहीं बनायी–– भारत के बेरोजगार युवाओं को परजीवी और... आगे पढ़ें

राजनीति में लेखकों की भूमिका

राजनीति में लेखकों की भूमिका1 ––न्गुगी वा थ्योंगो हम उपनिवेशवाद की समस्या को उठाये बगैर देशज संस्कृति की समस्या को नहीं उठा सकते, क्योंकि आज सभी देशज संस्कृतियाँ औपनिवेशिक, अर्ध–औपनिवेशिक और सह–औपनिवेशिक... आगे पढ़ें

शिक्षा में घोल दी नफरत की राजनीति (साजिश हिन्दुत्व के नाम पर)

–– राम शिरोमणि शुक्ल (यह लेख ‘समकालीन तीसरी दुनिया’ पत्रिका के नवम्बर 1998 के अंक से साभार लिया गया है। आज मोदी राज में इसकी प्रासंगिकता और बढ़ गयी है।) जब केन्द्र में भाजपा के नेतृत्व में... आगे पढ़ें


साहित्य

साहित्य लिखने की इच्छा

दिमाग में खयाल बहुत आते हैं। कई बार मन होता है कि उन खयालों को जोड़कर कुछ कविता, कहानी या उपन्यास बना दूँ। बहुत से पात्र भी दिमाग में घूमने लगते हैं। सभी पात्र संघर्षरत स्थिति में हैं। ये भी डर रहता है कि किसी पात्र... आगे पढ़ें


अन्तरराष्ट्रीय

अवर्गीकृत