उत्तराखण्ड के पेपर लीक पर मुख्यमंत्री धामी के नफरती बयान
उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का यह बयान कि–– “नकल माफियाओं और नकल जिहादियों को मिट्टी में मिला देंगे”, उस वक्त सामने आया जब परीक्षा घोटाले का भंडाफोड़ और गिरफ्तारियों के बाद भी बेरोजगार नौजवान सड़कों पर उतरे। सरकार ने इस मामले की जाँच के लिए एसआईटी गठित करने की घोषणा की। लेकिन आन्दोलनकारी इससे संतुष्ट नहीं हुए। इसी बीच एक मुस्लिम आरोपी की गिरफ्तारी के बाद इस मुद्दे को साम्प्रदायिक रंग देने के लिए धामी ने इस तरह का बयान दिया। सवाल यह है कि वास्तविक साजिश का असली मास्टरमाइण्ड कोई मुस्लिम या जेहादी है या इससे बड़ी सच्चाइयों को ढकने की कोशिश की गयी।
आरोपियों में जो नाम सबसे ज्यादा उठता है, वह है हकम सिंह–– जिसे हालिया गिरफ्तारियों में आरोपी बताया गया और जो पहले भी इसी तरह के काण्डों में फँस चुका हैय उस पर 2022 में चार्जशीट भी दाखिल हुई थी और बाद में सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली थी। मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि हकम सिंह पर आरोप है कि उसने परीक्षा–उम्मीदवारों से भारी रकम लेकर सफलता की गारण्टी देने जैसी कोशिशें कीं। लेकिन यही वह शख्स है जिसके बारे में कुछ राजनेताओं और नागरिकों का तर्क है कि उसे केवल एक “बड़़े पैमाने” के मामले का चेहरा बना दिया जा रहा है–– जबकि उससे जुड़े राजनीतिक कनेक्शनों और संरचनात्मक विफलताओं का व्यापक नेटवर्क अभी भी सवालों के घेरे से बाहर है।
यदि यह सच है कि हकम सिंह जैसे लोग गिरफ्तार हुए और जेल गये, छूट गये, तो उससे यह निष्कर्ष निकलना कि हर दोषी केवल व्यक्तिगत स्तर का जिम्मेदार है, काफी तर्कहीन है। दादाजी का वह कथन याद आने लायक है–––– “जिस खेत की बाड़ ही उजियाड खाने लग जाएगी, वहाँ भगवान भी कुछ नहीं कर सकता।” यह बात यहाँ बिल्कुल सटीक बैठती है –– जब संस्थागत पारदर्शिता, जवाबदेही और निगरानी ढीली पड़ जाती है, तो व्यक्तिगत विकृतियाँ ही नहींय पूरा तंत्र भ्रष्ट होने लगता है। परीक्षा व्यवस्था की कमजोरी और उस पर राजनीतिक संरक्षण का असर केवल कुछ नामों तक सीमित नहीं रहता–– यह युवा पीढ़ी के अवसरों, संवैधानिक भरोसे और समाज के नैतिक ताने–बाने को खोखला कर देता है।
अगर भाजपा के भीतर वाकई हकम सिंह जैसा कोई व्यक्ति है जिसने अपराधों में संलिप्तता दिखायी, तो सवाल उठता है कि क्या भाजपा एक छोटे–से जिला पंचायत सदस्य को त्वरित कार्रवाई कर के बाहर नहीं रख सकती थी? राजनीतिक व्यवहार में ‘दूर हटाना’ असल में नैतिक दायित्व भी है–– पद की गरिमा, पार्टी की साख और देश के नौजवानों का विश्वास बचाने का जिम्मा। लेकिन जब वही लोग जिन्हें आप अपने ही समूह का मानते हो, बार–बार विवादों में आते हैं और सरकारी संरक्षण पाते हैं, तो लोगों का विश्वास टूटता है और आक्रोश जन्म लेता है। यह विस्फोट तब और तेज हो जाता है जब सरकार सार्वजनिक तौर पर “हम सब पर कड़ी कार्रवाई करेंगे” कहती है पर जाँच–प्रक्रिया में पारदर्शिता को अपने जूते के नीचे रौन्द देती है–– जैसे सीबीआई जाँच को टालने या मामले के कुछ पहलुओं को अन्धेरे में रखने की प्रवृत्ति।
यह पूरा ताना–बाना कोई छोटा–मोटा खेल नहीं हैय यह बड़े पैमाने की सरकारी दिशा का नतीजा है–– जब सत्ता के शीर्ष पर बैठे लोग संसाधनों और अवसरों को कुछ चुने हुए लोगों के लिए खोल देते हैं, तो प्रदेश का लोक–हित दाँव पर लग जाता है। यह ठोस षड्यंत्रकारी संरचना केवल भ्रष्टचार में लिप्त कर्मियों की नहीं रहतीय यह राजनीतिक संरक्षण, मीडिया फ्रेमिंग और संस्थागत बचाव की मिलीभगत बन जाती है। प्रदेश में नौजवानों की व्यापक स्तर गोलबन्दी दिखाती है कि जनता अब जाग रही है–– यह जागृति केवल नारों से नहीं, वास्तविक सच्चाइयों के रूप में सामने आना चाहिए–– जो लोग बिहार, उत्तराखण्ड जैसे प्रदेशों के सार्वजनिक संसाधनों को निजी कॉर्पाेरेट और भाई–भतीजे के हवाले कर रहे हैं, या जो स्थानीय नौकरियों–उम्मीदवारों के भविष्य को बाजार में नीलाम कर रहे हैं, उन्हें जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री धामी का “नकल जिहाद” वाला बयान साम्प्रदायिक मानसिकता का घृणित उदाहरण है। परीक्षा घोटाला, जो सीधे–सीधे भ्रष्टाचार, सरकारी संरक्षण और अपराध का मामला है, जिसमें हिन्दु अपराधियों की संख्या कहीं ज्यादा है, सिर्फ एक मुस्लिम का नाम आता ही उसे “जिहाद” से जोड़ देना दरअसल साम्प्रदायिक और विभाजनकारी राजनीति की मिसाल है। यहाँ “जिहाद” शब्द आम जनता के दिमाग में मुसलमान से घृणा और आतंकवाद की तस्वीर पेश करती है। इस तरह, असली अपराधियों से ध्यान हटाकर मुद्दा हिन्दू–मुस्लिम विभाजन की ओर मोड़ दिया जाता है।
लेकिन हकीकत यह है कि इस काण्ड के मुख्य आरोपी–– जैसे––हकम सिंह–– खुद हिन्दू पृष्ठभूमि से आते हैं। ऐसे में “जिहाद” का टैग पूरी तरह नकली और भ्रामक है। इसका इस्तेमाल दो मकसद से होता है–– पहला, सरकार की नाकामियों से ध्यान हटानाय दूसरा, जनता में साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण पैदा करना। यानी जनता यह न सोचे कि सरकार अपने ही लोगों को क्यों बचा रही है, या सीबीआई जाँच से क्यों कतराती हैय बल्कि वह यह सोचे कि यह “मुस्लिम जिहाद” है, जिससे हिन्दू समाज को बचाना है।
साम्प्रदायिक राजनीति की यही साजिश है–– जहाँ असली गुनाहगारों की पहचान और सत्ता की जिम्मेदारी पर सवाल उठने चाहिए, वहाँ धार्मिक पहचान थोप दी जाती है। इससे न केवल न्याय प्रक्रिया विकृत होती है बल्कि सामाजिक सौहार्द भी बिगड़ता है। पेपर लीक जैसा अपराध जाति या धर्म से परे एक संगठित भ्रष्टाचार है–– इसे “जिहाद” कहना न केवल झूठ है, बल्कि युवाओं के भविष्य के साथ दुहरा खिलवाड़ है।
असल में धामी का साम्प्रदायिक वक्तव्य जनता की नाराजगी और विपक्षी सवालों को “देश–धर्म” की भावनाओं में डुबो देने की चाल है। सवाल यह है कि क्या नौजवानों की बेरोजगारी और भविष्य को बचाने के लिए सरकार साम्प्रदायिक शिगूफे छोड़ेगी या फिर असल दोषियों पर बिना भेदभाव सख्त कार्रवाई करेगी ?
अन्त में, यह भी स्पष्ट है कि मौजूदा आरोप–प्रत्यारोपों के बीच बेहद मेहनत से बनती हुई सार्वजनिक राय और भावनाएँ हैं–– कभी चुपके से चोरी, कभी अखबार या चैनल के खरीद–फरोख्त के आरोप, कभी–कभी सत्ता के दोगलापन की शिकायतें। अगर सचमुच चोर वही हैं, तो उन्हें रोना–धोना छोड़कर कानून के सामने लाया जाना चाहिएय लेकिन साथ ही यह भी माँग होनी चाहिए कि जाँच पूरी तरह स्वतंत्र और प्रभावी हों–– ताकि केवल चेहरों को टोकन तरीके से बदलकर मामला दबा न दिया जाये। लेकिन यह माँग किससे की जाये? सत्ता गूँगी–बहरी बनी बैठी है और आन्दोलन के क्रूर दमन पर आमादा है। ऐसे में व्यवस्था का आमूल परिवर्तन ही सकी विकल्प है।
Leave a Comment
लेखक के अन्य लेख
- अवर्गीकृत
-
- एक अकादमिक अवधारणा 20 Aug, 2022
- डीएचएफएल घोटाला : नवउदारवाद की एक और झलक 14 Mar, 2019
- फिदेल कास्त्रो सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था के हिमायती 10 Jun, 2020
- बायोमेडिकल रिसर्च 14 Jan, 2021
- भाषा और साहित्य के क्षेत्र में भारत को मुसलमानों का महान स्थायी योगदान 23 Sep, 2020
- सर्वोच्च न्यायलय द्वारा याचिकाकर्ता को दण्डित करना, अन्यायपूर्ण है. यह राज्य पर सवाल उठाने वालों के लिए भयावह संकेत है 20 Aug, 2022
- हो ची मिन्ह के देश में 5 May, 2026
- समाचार-विचार
-
- 130वाँ संविधान संशोधन विधेयक–– भाजपा का ‘एक पार्टी एक देश’ की तरफ बढ़ता एक और कदम 12 Dec, 2025
- स्विस बैंक में जमा भारतीय कालेधन में 50 फीसदी की बढ़ोतरी 20 Aug, 2022
- अगले दशक में विश्व युद्ध की आहट 6 May, 2024
- अफगानिस्तान में तैनात और ऑस्ट्रेलियाई सैनिकों की आत्महत्या 14 Jan, 2021
- अमरीका में ट्रम्प के खिलाफ आन्दोलन 7 Jul, 2025
- अमीरी–गरीबी की बढ़ती खाई और भगत सिंह के विचार 12 Dec, 2025
- अहमदाबाद में क्लीनिकल ट्रायल के जरिये गरीबों का शिकार 12 Dec, 2025
- आरओ जल–फिल्टर कम्पनियों का बढ़ता बाजार 6 May, 2024
- इजराइल–अरब समझौता : डायन और भूत का गठबन्धन 23 Sep, 2020
- उत्तर प्रदेश : लव जेहाद की आड़ में धर्मान्तरण के खिलाफ अध्यादेश 14 Jan, 2021
- उत्तर प्रदेश में मीडिया की घेराबन्दी 13 Apr, 2022
- उत्तराखण्ड के पेपर लीक पर मुख्यमंत्री धामी के नफरती बयान 12 Dec, 2025
- उनके प्रभु और स्वामी 14 Jan, 2021
- एआई : तकनीकी विकास या आजीविका का विनाश 17 Nov, 2023
- एआई तकनीकी विकास और उसके सामाजिक सरोकार 12 Dec, 2025
- काँवड़ के बहाने ढाबों–ढेलों पर नाम लिखाने का साम्प्रदायिक फरमान 13 Sep, 2024
- किसान आन्दोलन : लीक से हटकर एक विमर्श 14 Jan, 2021
- कुम्भ मेले में भगदड़ 7 Jul, 2025
- कोयला खदानों के लिए भारत के सबसे पुराने जंगलों की बलि! 23 Sep, 2020
- कोरोना जाँच और इलाज में निजी लैब–अस्पताल फिसड्डी 10 Jun, 2020
- कोरोना ने सबको रुलाया 20 Jun, 2021
- क्या उत्तर प्रदेश में मुसलमान होना ही गुनाह है? 23 Sep, 2020
- क्यूबा तुम्हारे आगे घुटने नहीं टेकेगा, बाइडेन 16 Nov, 2021
- खाली जेब, खाली पेट, सर पर कर्ज लेकर मजदूर कहाँ जायें 23 Sep, 2020
- खिलौना व्यापारियों के साथ खिलवाड़ 23 Sep, 2020
- गाँव में बढ़ती बीमारी, बेहाल जनता और बदहाल व्यवस्था 12 Dec, 2025
- छल से वन अधिकारों का दमन 15 Jul, 2019
- छात्रों को शोध कार्य के साथ आन्दोलन भी करना होगा 19 Jun, 2023
- जीवन रक्षक दवाइयाँ ही बन रहीं जानलेवा 5 May, 2026
- त्रिपुरा हिंसा की वह घटना जब तस्वीर लेना ही देशद्रोह बन गया! 13 Apr, 2022
- दिल्ली उच्च न्यायलय ने केन्द्र सरकार को केवल पाखण्डी ही नहीं कहा 23 Sep, 2020
- दिल्ली के उत्तम नगर में दंगे की कोशिश नाकाम 5 May, 2026
- दिल्ली दंगे का सबक 11 Jun, 2020
- देश के बच्चे कुपोषण की गिरफ्त में 14 Dec, 2018
- न्यूज चैनल : जनता को गुमराह करने का हथियार 14 Dec, 2018
- बंगले में लगी आग तो सामने आयी हकीकत 7 Jul, 2025
- बच्चों का बचपन और बड़ों की जवानी छीन रहा है मोबाइल 16 Nov, 2021
- बीमारी से मौत या सामाजिक स्वीकार्यता के साथ व्यवस्था द्वारा की गयी हत्या? 13 Sep, 2024
- बुद्धिजीवियों से नफरत क्यों करते हैं दक्षिणपंथी? 15 Jul, 2019
- बैंकों की बिगड़ती हालत 15 Aug, 2018
- बढ़ते विदेशी मरीज, घटते डॉक्टर 15 Oct, 2019
- भारत देश बना कुष्ठ रोग की राजधानी 20 Aug, 2022
- भारत ने पीओके पर किया हमला : एक और फर्जी खबर 14 Jan, 2021
- भीड़ का हमला या संगठित हिंसा? 15 Aug, 2018
- मजदूरों–कर्मचारियों के हितों पर हमले के खिलाफ नये संघर्षों के लिए कमर कस लें! 10 Jun, 2020
- महाराष्ट्र के कपास किसानों की दुर्दशा उन्हीं की जबानी 23 Sep, 2020
- महाराष्ट्र में कर्मचारी भर्ती का ठेका निजी कम्पनियों के हवाले 17 Nov, 2023
- महाराष्ट्र में चार सालों में 12 हजार से ज्यादा किसानों ने आत्महत्या की 15 Jul, 2019
- महालनोबिस ने बनाया और मोदी ने तोड़ा 12 Dec, 2025
- माइक्रोफाइनेंस उद्योग– मुनाफे की भेंट चढ़ती जिन्दगियाँ 12 Dec, 2025
- मानव अंगों की तस्करी का घिनौना व्यापार 13 Sep, 2024
- मौत के घाट उतारती जोमैटो की 10 मिनट ‘इंस्टेण्ट डिलीवरी’ योजना 20 Aug, 2022
- यूपीएससी की तैयारी में लगे छात्रों की दुर्दशा, जिम्मेदार कौन? 13 Sep, 2024
- रक्षा बजट में रिकार्ड बढ़ोतरी किसके लिए 7 Jul, 2025
- राजस्थान में परमाणु पावर प्लाण्ट का भारी विरोध 13 Sep, 2024
- रेलवे का निजीकरण : आपदा को अवसर में बदलने की कला 23 Sep, 2020
- रोजगार के नाम पर धोखाधड़ी 7 Jul, 2025
- लोग पुरानी पेंशन योजना की बहाली के लिए क्यों लड़ रहे हैं 17 Nov, 2023
- विधायिका में महिला आरक्षण की असलियत 17 Nov, 2023
- वैश्विक लिंग असमानता रिपोर्ट 20 Aug, 2022
- श्रीलंका पर दबाव बनाते पकड़े गये अडानी के “मैनेजर” प्रधानमंत्री जी 20 Aug, 2022
- संस्कार भारती, सेवा भारती––– प्रसार भारती 14 Jan, 2021
- सत्ता–सुख भोगने की कला 15 Oct, 2019
- सरकार द्वारा लक्ष्यद्वीप की जनता की संस्कृति पर हमला और दमन 20 Jun, 2021
- सरकार बहादुर कोरोना आपके लिए अवसर लाया है! 10 Jun, 2020
- सरकार, न्यायपालिका, सेना की आलोचना करना राजद्रोह नहीं 15 Oct, 2019
- सरकारी विभागों में ठेका कर्मियों का उत्पीड़न 15 Aug, 2018
- स्मार्ट सिटी टाँय टाँय फिस्स 7 Jul, 2025
- हम इस फर्जी राष्ट्रवाद के सामने नहीं झुकेंगे 13 Apr, 2022
- हाथरस की भगदड़ में मौत का जिम्मेदार कौन 13 Sep, 2024
- हिन्दुत्व के पोस्टर बॉय हिमंता बिस्वा सरमा और भ्रष्टाचार 5 May, 2026
- हुकुम, बताओ क्या कहूँ जो आपको चोट न लगे। 13 Apr, 2022
- ‘मजदूरों के ऊपर तजुर्बा करो, अमीरों की सेवा करो’ 7 Jul, 2025
- कविता
-
- अपने लोगों के लिए 6 May, 2024
- कितने और ल्हासा होंगे 23 Sep, 2020
- गेहुँआ अफ्रीका 5 May, 2026
- चल पड़ा है शहर कुछ गाँवों की राह 23 Sep, 2020
- जी एन साईबाबा की कविताएँ 1 Jan, 2025
- तुच्छ जीवन की महान गाथा 5 May, 2026
- बच्चे काम पर जा रहे हैं 19 Jun, 2023
- साक्षात्कार
-
- कम कहना ही बहुत ज्यादा है : एडुआर्डो गैलियानो 20 Aug, 2022
- चे ग्वेरा की बेटी अलेदा ग्वेरा का साक्षात्कार 14 Dec, 2018
- नेपाल के मौजूदा हालात पर कॉमरेड आहुति से बातचीत 5 May, 2026
- फैज अहमद फैज के नजरिये से कश्मीर समस्या का हल 15 Oct, 2019
- भारत के एक बड़े हिस्से में मर्दवादी विचार हावी 15 Jul, 2019
- साहित्य
-
- अव्यवसायिक अभिनय पर दो निबन्ध –– बर्तोल्त ब्रेख्त 17 Feb, 2023
- औपनिवेशिक सोच के विरुद्ध खड़ी अफ्रीकी कविताएँ 6 May, 2024
- कविता का मूलस्रोत 12 Dec, 2025
- किसान आन्दोलन : समसामयिक परिदृश्य 20 Jun, 2021
- खामोश हो रहे अफगानी सुर 20 Aug, 2022
- चिली में गुप्तवास 7 Jul, 2025
- जनतांत्रिक समालोचना की जरूरी पहल – कविता का जनपक्ष (पुस्तक समीक्षा) 20 Aug, 2022
- जैक लण्डन का उपन्यास ‘आयरन हील’ के बारे में 1 Jan, 2025
- निकोलाई ओस्त्रोव्स्की का उपन्यास ‘अग्निदीक्षा’ 4 Jul, 2025
- निशरीन जाफरी हुसैन का श्वेता भट्ट को एक पत्र 15 Jul, 2019
- फासीवाद के खतरे : गोरी हिरणी के बहाने एक बहस 13 Sep, 2024
- फैज : अँधेरे के विरुद्ध उजाले की कविता 15 Jul, 2019
- श्रम और साहित्य पर दो दिवसीय संगोष्ठी सम्पन्न 5 May, 2026
- सच लिखने में पाँच कठिनाइयाँ 12 Dec, 2025
- सामाजिक चेतना जगाने में नाटकों की भूमिका : नोबेल विजेता––दारियो लुइगी एंजेलो फो 1 Jan, 2025
- “मैं” और “हम” 14 Dec, 2018
- सामाजिक-सांस्कृतिक
-
- अम्बेडकर ने कहा था कि हिन्दू राज भारत के लिए सबसे बड़ी आपदा होगी 4 Jul, 2025
- उपभोक्तावाद की संस्कृति 12 Dec, 2025
- एक आधुनिक कहानी एकलव्य की 23 Sep, 2020
- एपस्टीन की फाइलों से साफ जाहिर होता है कि कुलीन वर्ग कैसे काम करता है 5 May, 2026
- एलन मस्क और महिलाओं की ‘सुरक्षा’ का झूठा दक्षिणपंथी आख्यान 7 Jul, 2025
- किसान आन्दोलन के आह्वान पर मिट्टी सत्याग्रह यात्रा 20 Jun, 2021
- गैर बराबरी की महामारी 20 Aug, 2022
- घोस्ट विलेज : पहाड़ी क्षेत्रों में राज्यप्रेरित पलायन –– मनीषा मीनू 19 Jun, 2023
- दिल्ली के सरकारी स्कूल : नवउदारवाद की प्रयोगशाला 14 Mar, 2019
- पहाड़ में नफरत की खेती –– अखर शेरविन्द 19 Jun, 2023
- सबरीमाला मन्दिर में महिलाओं के प्रवेश पर राजनीति 14 Dec, 2018
- साम्प्रदायिकता और संस्कृति 20 Aug, 2022
- हमारा जार्ज फ्लायड कहाँ है? 23 Sep, 2020
- ‘प्रतिरोध की संस्कृति’ पर केन्द्रित ‘कथान्तर’ का विशेषांक 13 Sep, 2024
- कहानी
-
- एक देवदासी 12 Dec, 2025
- जामुन का पेड़ 8 Feb, 2020
- पानीपत की चैथी लड़ाई 16 Nov, 2021
- माटी वाली 17 Feb, 2023
- समझौता 13 Sep, 2024
- अन्तरराष्ट्रीय
-
- अमरीका की हथकड़ी–बेड़ी नीति और भारतीय शासकों की बेहयाई 7 Jul, 2025
- अमरीका बनाम चीन : क्या यह एक नये शीत युद्ध की शुरुआत है 23 Sep, 2020
- इजराइल का क्रिस्टालनाख्त नरसंहार 17 Nov, 2023
- क्या लोकतन्त्र का लबादा ओढ़े अमरीका तानाशाही में बदल गया है? 14 Dec, 2018
- नरसंहार पर पर्दा डालने वाले आर्थिक सिद्धान्त के लिए नोबेल 4 Jul, 2025
- पश्चिम एशिया में निर्णायक मोड़ 15 Aug, 2018
- प्रतिबन्धों का मास्को पर कुछ असर नहीं पड़ा है, जबकि यूरोप 4 सरकारें गँवा चुका है: ओरबान 20 Aug, 2022
- बोलीविया में तख्तापलट : एक परिप्रेक्ष्य 8 Feb, 2020
- भारत–इजराइल साझेदारी को मिली एक वैचारिक कड़ी 15 Oct, 2019
- भोजन, खेती और अफ्रीका : बिल गेट्स को एक खुला खत 17 Feb, 2023
- महामारी के बावजूद 2020 में वैश्विक सामरिक खर्च में भारी उछाल 21 Jun, 2021
- लातिन अमरीका के मूलनिवासियों, अफ्रीकी मूल के लोगों और लातिन अमरीकी संगठनों का आह्वान 10 Jun, 2020
- वह दिन जब परमाणु सम्पन्न ईरान का जन्म हुआ 7 Jul, 2025
- सउ़दी अरब की साम्राज्यवादी विरासत 16 Nov, 2021
- ‘जल नस्लभेद’ : इजराइल कैसे गाजा पट्टी में पानी को हथियार बनाता है 17 Nov, 2023
- श्रद्धांजलि
- राजनीति
-
- 106 वर्ष प्राचीन पटना संग्रहालय के प्रति बिहार सरकार का शत्रुवत व्यवहार –– पुष्पराज 19 Jun, 2023
- इलेक्टोरल बॉण्ड घोटाले पर जानेमाने अर्थशास्त्री डॉक्टर प्रभाकर का सनसनीखेज खुलासा 6 May, 2024
- कर्नाटक सरकार देवनहल्ली के किसानों के साथ विश्वासघात कर रही है 4 Jul, 2025
- कोरोना वायरस, सर्विलांस राज और राष्ट्रवादी अलगाव के खतरे 10 Jun, 2020
- जनसंख्या नियंत्रण विधेयक का तर्कहीन मसौदा 21 Nov, 2021
- डिजिटल कण्टेण्ट निर्माताओं के लिए लाइसेंस राज 13 Sep, 2024
- नया वन कानून: वन संसाधनों की लूट और हिमालय में आपदाओं को न्यौता 17 Nov, 2023
- नये श्रम कानून मजदूरों को ज्यादा अनिश्चित भविष्य में धकेल देंगे 14 Jan, 2021
- बेरोजगार भारत का युग 20 Aug, 2022
- बॉर्डर्स पर किसान और जवान 16 Nov, 2021
- मोदी के शासनकाल में बढ़ती इजारेदारी 14 Jan, 2021
- सत्ता के नशे में चूर भाजपाई कारकूनों ने लखीमपुर खीरी में किसानों को कार से रौंदा 23 Nov, 2021
- हरियाणा किसान आन्दोलन की समीक्षा 20 Jun, 2021
- जीवन और कर्म
-
- दहशतगर्दी का फर्जी ठप्पा 1 Jan, 2025
- रामवृक्ष बेनीपुरी का बाल साहित्य : मनुष्य की अपराजेय शक्ति में आस्था 14 Jan, 2021
- राजनीतिक अर्थशास्त्र
- व्यंग्य
-
- अगला आधार पाठ्यपुस्तक पुनर्लेखन –– जी सम्पत 19 Jun, 2023
- आजादी को आपने कहीं देखा है!!! 20 Aug, 2022
- इन दिनों कट्टर हो रहा हूँ मैं––– 20 Aug, 2022
- नुसरत जहाँ : फिर तेरी कहानी याद आयी 15 Jul, 2019
- बडे़ कारनामे हैं बाबाओं के 13 Sep, 2024
- विचार-विमर्श
-
- अतीत और वर्तमान में महामारियों ने बड़े निगमों के उदय को कैसे बढ़ावा दिया है? 23 Sep, 2020
- अस्तित्व बनाम अस्मिता 14 Mar, 2019
- क्या है जो सभी मेहनतकशों में एक समान है? 23 Sep, 2020
- क्रान्तिकारी विरासत और हमारा समय 13 Sep, 2024
- दिल्ली सरकार की ‘स्कूल्स ऑफ स्पेशलाइज्ड एक्सलेंस’ की योजना : एक रिपोर्ट! 16 Nov, 2021
- धर्म की आड़ 17 Nov, 2023
- पलायन मजा या सजा 20 Aug, 2022
- राजनीति में आँधियाँ और लोकतंत्र 14 Jun, 2019
- लीबिया की सच्चाई छिपाता मीडिया 17 Nov, 2023
- लोकतंत्र के पुरोधाओं ने लोकतंत्र के बारे में क्या कहा था? 23 Sep, 2020
- विकास की निरन्तरता में–– गुरबख्श सिंह मोंगा 19 Jun, 2023
- विश्व चैम्पियनशिप में पदक विजेता महिला पहलवान विनेश फोगाट से बातचीत 19 Jun, 2023
- सरकार और न्यायपालिका : सम्बन्धों की प्रकृति क्या है और इसे कैसे विकसित होना चाहिए 15 Aug, 2018
- मीडिया
-
- मीडिया का असली चेहरा 15 Mar, 2019
- फिल्म समीक्षा
-
- समाज की परतें उघाड़ने वाली फिल्म ‘आर्टिकल 15’ 15 Jul, 2019