मई 2026, अंक 50 में प्रकाशित

हिन्दुत्व के पोस्टर बॉय हिमंता बिस्वा सरमा और भ्रष्टाचार

हिन्दुत्व का पोस्टर बॉय बनने से पहले हिमंता बिस्वा सरमा कांग्रेस में थे और भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरे हुए थे। भाजपा की वाशिंग मशीन में धुलकर पाक–साफ हो गये, लेकिन उफ, यह भ्रष्टाचार का गहरा जिद्दी दाग फिर भी उनका पीछा नहीं छोड़ रहा है। हाल ही में उनकी पत्नी पर कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने ताबड़तोड़ आरोप लगाये हैं। उनका दावा है कि वह महिला बड़े घोटालों में लिप्त है जिसके पास कई देशों की नागरिकता है।

साल 2026 की शुरुआत, कई राज्यों में चुनावी सरगर्मी तेज हो गयी। नेता फिर वादों और नारों के साथ जनता के बीच उतर आये। इसी बीच कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने नयी दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर असम के मुख्यमंत्री हिमंता और उनके परिवार पर गम्भीर आरोप लगाये। उन्होंने दावा किया कि हिमंता, उनकी पत्नी रिनिकी भुइयाँ सरमा और बेटे के नाम अमरीका के व्योमिंग में “एचरिनिकीभुइयांसरमा एलएलसी” नाम की एक कम्पनी दर्ज है, जिसकी कथित कीमत करीब 52 हजार करोड़ रुपये है। यह रकम असम के सालाना बजट का लगभग 84 प्रतिशत है।

पवन खेड़ा ने यह भी आरोप लगाया कि दुबई में हिमंता की पत्नी के नाम एक आवासीय फ्लैट और एक होटल भी हैं जिनका चुनावी हलफनामे में उल्लेख नहीं किया गया। उनका आरोप है कि हिमंता ने फर्जी कम्पनियाँ बनाकर विदेशों में पैसा छिपाया है। हालाँकि उन्होंने वही किया जो सभी आरोपी अपराध सिद्ध होने से पहले करते हैं, इन सभी आरोपों को पूरी तरह खारिज कर उन्हें चुनावी साजिश बताया। लेकिन सवाल उठता है कि क्या इसके पीछे कोई गहरी सच्चाई छिपी हुई है?

इन आरोपों के साथ पवन खेड़ा ने दावा किया कि हिमंता की पत्नी रिनिकी के पास यूएई, एण्टीगुआ, बारबुडा तथा मिस्र जैसे देशों के पासपोर्ट हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जो नेता अपनी राजनीति में राष्ट्रवाद और हिन्दुत्व की बात करता है, उसकी पत्नी के पास कई देशों के पासपोर्ट कैसे हो सकते हैं? जबकि भारत में दोहरी नागरिकता गैर–कानूनी है।

हिमंता पर भ्रष्टाचार के आरोप लगना कोई नयी बात नहीं है। साल 2015 में भाजपा ने “सागा ऑफ स्कैम्स इन कांग्रेस रूल्ड स्टेट्स” नाम से एक पुस्तिका जारी की थी, जिसमें उन पर लुई बर्गर घोटाले में शामिल होने का आरोप लगा था। न्यू जर्सी स्थित कम्पनी लुई बर्गर इंटरनेशनल ने अमरीकी अदालत में स्वीकार किया था कि उसने गुवाहाटी की जल आपूर्ति परियोजना हासिल करने के लिए भारतीय अधिकारियों को लगभग 9–3 करोड़ रुपये की रिश्वत दी थी। उस समय हिमंता गुवाहाटी विकास विभाग के प्रभारी मंत्री थे। सीबीआई और सीआईडी ने उन्हें पूछताछ के लिए बुलाया भी था। लेकिन अगस्त 2015 में हिमंता भाजपा में शामिल हो गये और उनके सारे गुनाह भाजपा की वाशिंग मशीन मे धुल गये। इसके अलावा सारदा चिटफण्ड घोटाले में भी उनका नाम सामने आया था। सारदा समूह के प्रमुख सुदीप्तो सेन ने सीबीआई को लिखे पत्र में स्वीकार किया था कि उन्होंने हिमंता को लगभग 3 करोड़ रुपये दिये थे।

कोरोना महामारी के दौरान भी हिमंता और उनके परिवार पर कई सवाल उठे। आरोप लगा कि उनकी पत्नी की कम्पनी जेसीबी इण्डस्ट्रीज को असम स्वास्थ्य विभाग ने 990 रुपये प्रति पीपीई किट की दर से ऑर्डर दिया, जबकि दूसरी कम्पनी को उसी दिन 600 रुपये प्रति किट के हिसाब से ऑर्डर मिला था। उस समय हिमंता असम के स्वास्थ्य मंत्री थे। विपक्ष ने आरोप लगाया कि अपनी पत्नी की कम्पनी को फायदा पहुँचाने के लिए ज्यादा कीमत पर ठेका दिया गया। बाद में यह भी सामने आया कि कम्पनी ने तय मात्रा में पूरी आपूर्ति नहीं की।

हिमंता पर केवल आर्थिक घोटालों के ही नहीं, बल्कि गम्भीर राजनीतिक आरोप भी लगे हैं। असम के पूर्व मुख्यमंत्री प्रफुल्ल कुमार महन्त ने 2019 में दावा किया था कि कांग्रेस नेता मनबेन्द्र सरमा की 1991 में हुई हत्या के मामले में भी हिमंता का हाथ था और इसी के चलते उन्हें ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन (एएएसयू) से निलम्बित किया गया था।

क्या हिमंता से जुड़े ये आरोप केवल एक व्यक्ति पर लगे हैं या वे भारतीय राजनीति के गहरे सच को उजागर करते हैं जिसमें भ्रष्टाचार ही शिष्टाचार है। जो जितना बड़ा भ्रष्टाचारी, उसका उतना पलड़ा भारी। भाजपा का यही कायदा है कि वह दूध की रखवाली बिल्ली को सौंप देती है, जिसके बाद समझा जा सकता है कि देश–समाज का भविष्य क्या होगा।

अभी असम हुए चुनाव में जीतकर वह फिर से मुख्यमन्त्री बन गये है। यह असम के साथ देश की जनता का दुर्भाग्य ही है।

––हर्षित

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