संपादकीय
उन्मादी–फासीवादी ट्रम्प का टैरिफ युद्ध और भारत सरकार का आत्मसमर्पण
देश-विदेश के
दिसंबर 2025 अंक में
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सामाजिक-सांस्कृतिक
उपभोक्तावाद की संस्कृति
–– श्यामाचरण दुबे धीरे–धीरे सब कुछ बदल रहा है। एक नयी जीवन–शैली अपना वर्चस्व स्थापित कर रही है। उसके साथ आ रहा है एक नया जीवन–दर्शन–– उपभोक्तावाद का दर्शन। उत्पादन बढ़ाने पर जोर है चारों ओर। यह उत्पादन... आगे पढ़ें
जीवन और कर्म
जाँ निसार अख़्तर : मन मोरा बावरा
उर्दू अदब में जाँ निसार अख़्तर का एक अलग मुक़ाम है। वह ताज़िन्दगी मार्क्सवादी उसूलों के क़ायल रहे हैं। उन्होंने अपनी ग़ज़लों, नज़्मों और फ़िल्मी नग़मों से मजलूमों और बेबस लोगों की ख़्िादमत की। आम जनता को नींद... आगे पढ़ें
व्लादिमीर मायाकोव्स्की की कविताएँ (संघर्ष और क्रान्ति का उद्घोष)
मैं जनता का नेता हूँ, और साथ ही जनता का सेवक भी। मेहनतकश हमारी ही आवाज में बोलता है, हम सर्वहारा कलम के सिपाही हैं। (कविता और टैक्स–इंस्पेक्टर) कविता का यह अंश जिस कवि की कलमनवाजी का नजीर... आगे पढ़ें
राजनीति
एआई तकनीकी का गाजा नरसंहार में खतरनाक इस्तेमाल
दुनिया भर में बुद्धिजीवियों के बीच की खूबियाँ बताने की होड़ सी चल रही है, लेकिन उसके इस्तेमाल के विनाशकारी परिणाम भी सामने आ रहे हैं। इजराइली सेना द्वारा एआई का इस्तेमाल इस बात का पक्का सबूत है।... आगे पढ़ें
‘बिग ब्रदर इज वाचिंग यू’– पिछले 50 सालों के आन्दोलनों का गृह मन्त्री ने माँगा ब्यौरा
“कहीं गैस का धुआँ है, कहीं गोलियों की बारिश शब–ए–अहद–ए–कमनिगाही तुझे किस तरह सुनाएँ” ––हबीब जालिब बीते जुलाई महीने में केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पुलिस विभाग और खुफिया एजेंसियों को पिछले 50 साल में हुए... आगे पढ़ें
साहित्य
कविता का मूलस्रोत
–– देवेन्द्र सत्यार्थी आदिम युग के लोकगीतों की विवेचना करते हुए कॉडवेल ने इस बात पर विशेष जोर दिया था कि उस समय सामाजिक चेतना अपने प्रारम्भिक काल में थी और जिस प्रकार विकासमान समाज ने वातावरण के... आगे पढ़ें
प्रसिद्ध रूसी उपन्यास ‘सीमेंट’ का परिचय
“श्रम ही मानव समाज की आधारशिला है।” मनुष्य का सबसे जरूरी गुण है श्रम करने की उसकी क्षमता, जिसके अभाव में उसका नैतिक और शारीरिक पतन हो जाता है। “मैं सीमेंट के बारे में कुछ शब्द कहना चाहूँगा।... आगे पढ़ें
सच लिखने में पाँच कठिनाइयाँ
–बर्तोल्त ब्रेख्त (1935) जो कोई भी इन दिनों, झूठ और अज्ञानता से लड़ना चाहता है और सच को लिखना चाहता है उसे कम से कम पाँच कठिनाइयों पर जीत हासिल करनी पड़ेगी। जब सच्चाई का हर जगह विरोध... आगे पढ़ें
कहानी
एक देवदासी
भगवान की आड़ में मनुवादियों का काला धंधा सदियों से चल रहा है। हजारों देवदासियों की चीखें आज भी न्याय की गुहार लगा रही हैं। कोई है उनकी पुकार सुनने वाला ? “मुझे निर्वस्त्र करके 100 किलो का... आगे पढ़ें