दिसंबर 2025, अंक 49 में प्रकाशित

लोकतंत्र के स्वनामधन्य देश अमरीका में गूँज रहे लोकतंत्र बचाने के नारे

नवम्बर में अमरीका का ‘नो किंग प्रोटेस्ट’ नयी ऊँचाई पर पहुँच गया। इसमें 70 लाख से ज्यादा लोग शामिल हो चुके हैं। यह विरोध प्रदर्शन  राष्ट्रपति ट्रम्प के तानाशाह रवैये के खिलाफ इसी साल जून में शुरू हुआ था और लगातार जारी है। 19 अक्टूबर को भी अमरीका में राष्ट्रपति ट्रम्प की नीतियों के खिलाफ कई शहरों में विरोध प्रदर्शन हुए थे। सड़कें और सबवे लोगों से तर थे। ‘नो किंग्स डे’ के मौके पर इस आन्दोलन में न्यूयार्क जैसे बड़े शहरों के लोग भी सड़कों पर थे। उनका कहना था कि ट्रम्प खुद को राष्ट्रपति नहीं, बल्कि राजा समझने लगा है। यह प्रदर्शन राजधानी वॉशिंगटन डीसी, न्यूयॉर्क, शिकागो, मियामी और लॉस एंजेलिस जैसे कई महत्वपूर्ण शहरों में हुआ। अमरीका के 2700 से ज्यादा शहर ‘नो किंग’, ‘डेमोक्रेसी नोट मोनार्की’, ‘द कॉन्स्टिट्यूशन इज नॉट ऑप्शनल’, ‘पीपल्स ओवर प्रॉफिट’ आदि पोस्टर और नारों से गूँज उठे। यह सिर्फ नारे नहीं, बल्कि व्यवस्था के खिलाफ जनता का आक्रोश था। इन प्रदर्शनों की खबरों से जून के अखबार पहले से ही पटे थे कि इस बार इनमें 70 लाख से ज्यादा लोग शामिल हो गये।

राष्ट्रपति पद पर ट्रम्प की वापसी पर लोगों का कहना था कि उसने राष्ट्रपति पद की शक्तियों का मनमर्जी से इस्तेमाल किया है। उसने कांग्रेस से स्वीकृत फंडिंग को रोका, संघीय सरकार में छँटनी की, कई देशों पर व्यापक टैरिफ लगाये, गवर्नरों के विरोध के बावजूद कई शहरों में व्हाइट नेशनल गार्ड की तैनाती की। इसके साथ ही ट्रम्प प्रशासन ने प्रवासी नीति, न्याय विभाग पर दबाव और सरकारी कामकाज को प्रभावित करने वाली कई कार्रवाइयाँ कीं। ट्रम्प की इमीग्रेशन पॉलिसी, शटडाउन पॉलिसी और लाखों अमरीकी लोगों की स्वास्थ्य सेवाओं में कटौती का जनता जोरदार विरोध कर रही है।

आन्दोलनकारियों का कहना है कि ट्रम्प की नीतियाँ लोकतंत्र पर हमला हैं, अमरीका के संविधान पर हमला हैं। ट्रम्प की इन नीतियों के चलते ही जनता विरोध में उठ खड़ी हुई। इन विरोध प्रदर्शनों के समर्थन में सिर्फ अमरीका ही नहीं, बल्कि यूरोप मे जर्मनी, स्पेन, इटली के लोग भी सड़कों पर उतार आये। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह लड़ाई लोकतंत्र बचाने की है।

यह वही ट्रम्प है जिसने सत्ता में लौटने के बाद “मेक अमरीका ग्रेट अगेन (मागा)” का वादा किया था, लेकिन वह आज हटधर्मिता के साथ जन विरोधी नीतियों को देश के पुनर्निर्माण के लिए जरूरी बता रहा है। जनता उसे तानाशाह या फासीवादी कह रही है और उसके खिलाफ सड़कों पर है। उसकी नीतियाँ अमरीका के लोकतंत्र और संविधान को खत्म करने की ओर आगे बढ़ रही हैं।

फॉक्स न्यूज को दिये एक इण्टरव्यू में ट्रम्प ने काइयाँपन के साथ कहा कि ‘मैं कोई राजा नहीं हूँ’ और उसी दिन यूथ स्पेशल पर खुद का एक एआई वीडियो भेजा। इसमें ट्रम्प राजा की पोशाक में लड़ाकू विमान चला रहा है और प्रदर्शनकारियों पर कीचड़ फेंक रहा है। ट्रम्प लोकतंत्र का मजाक उड़ाने और पूरे देश की आन्दोलनरत जनता को नीच साबित करने में जुटा हुआ है।

यह मात्र एक वीडियो नहीं, बल्कि ट्रम्प की राजशाही मानसिकता को दिखाता है जो लोकतंत्र के भीतर तानाशाह की भाषा बोलता है। उसके कदम साफ संकेत दे रहे हैं कि अमरीकी सत्ता किस तरह से तानाशाही की ओर बढ़ चली है। अमरीका में कॉरपोरेट घरानों और सैन्य पूँजी का वर्चस्व बढ़ रहा है। आम अमरीकी नागरिक का लोकतांत्रिक अधिकार सिकुड़ता जा रहा है।

उसकी नीतियाँ साफ दिखाती हैं कि राजनीतिक केन्द्रीकरण, लोकतांत्रिक संस्थाओं का क्षरण और वित्तीय पूँजी की निरंकुशता ने अमरीका जैसे साम्राज्यवादी देश को आज रसातल में पहुँचा दिया है। जो देश खुद को सबसे विकसित और सबसे शक्तिशाली बताते हैं, वे भी पूँजी निवेश के गहरे संकट से जूझ रहे हैं। दुनिया पर वर्चस्व का मंसूबा रखने वाले ने अन्तत: अपने ही देश की जनता पर दमन थोप दिया है।

ट्रम्प की घरेलू और विदेशी नीतियाँ से साफ है कि अमरीकी वित्तीय पूँजी का संकट न सिर्फ अमरीका में बल्कि पूरी दुनिया में फैल रहा है। इसी बढ़ते संकट ने अमरीका सहित पूरे विश्व में बौखलाहट पैदा की है। साम्राज्यवादी वित्तीय संकट का ही परिणाम है कि शासक वर्ग आज अपने सबसे क्रूर रूप में सामने आ रहा है और जनता पर दमनकारी नीतियाँ थोपने पर उतारू है। उसका यही रवैया उसे मौत की तरफ ले जायेगा। दुनिया एक नये इतिहास की तरफ बढ़ रही है, जब तानाशाहों का अन्त होगा।

Leave a Comment