ट्रम्प मीडिया एण्ड टेक्नोलॉजी ग्रुप की काली करतूत
सनक के धनी अमरीका के राष्ट्रपति ट्रम्प की एक फर्म है–– ट्रम्प मीडिया एण्ड टेक्नोलॉजी ग्रुप (टीएमटीजी)। इसने योजना बनायी कि शेयर मार्केट के दीवानों से एक लाख डॉलर हर महीने वसूले जायें। इसके बदले वह लोगों को न्यूज से पहले सूचित करेंगे कि ट्रम्प क्या बोलने वाले हैं। क्योंकि ट्रम्प के बयानों से शेयर बाजार में अफरा–तफरी मचती है। खास तौर पर युद्ध, तेल, आर्थिक प्रतिबन्ध जैसे बयानों से ट्रम्प दुनिया भर के मुद्रा और माल बाजारों को झकझोर देते हैं। अपने इन बयानों की पूर्व सूचना देकर मुनाफाखोर ट्रम्प कमाई में इजाफा चाहते हैं।
टीएमटीजी ने “ट्रूथ एपीआई ” नाम की एक सेवा शुरू की है। इसके जरिये ट्रेडिंग फर्मों को ट्रम्प के बयान आम जनता तक पहुँचने से पहले उपलब्ध कराने की पेशकश की गयी। रिपोर्टों के मुताबिक इस सुविधा के लिए शुरुआती कीमत एक लाख डॉलर प्रति माह तक रखी गयी है। अब इस घटना की तुलना पूँजीवाद के आदर्शवादी सिद्धान्तों से कर लेते हैं–– पूँजीवाद का ध्वज सम्भालने वाले अमरीका के कोर्ट ने ही शेयर बाजार की समान सूचना पर एक सिद्धान्त दिया था। अमरीकी अदालत ने एक मामले की सुनवाई करते हुए 1968 में सभी लोगों तक समान सूचना पहुँचने का सिद्धान्त दिया था। अपने निजी हित के लिए ट्रम्प ने अपने देश की अदालत का ही मखौल उड़ाया है।
मजेदार बात यह कि जुलाई 2026 में यह प्रस्ताव आया और अगस्त 2026 में दर्जनों हाई फ्रिक्वेंसी ट्रेडिंग फर्म इस सेवा को प्राप्त करने के लिए भुगतान कर चुकी थीं। हाई फ्रिक्वेंसी ट्रेडिंग फर्म ऐसी फर्म होती हैं जो शेयर बाजार में चन्द सेकण्ड में करोड़ों का कारोबार करती हैं। कुछ सेकण्ड में ही ये शेयर बाजार की चाल–ढाल बदल देती हैं। इनके पास अगर कोई सूचना पहले से हो तो यह करोड़ों निवेशकों की पूँजी को हड़प सकती हैं। कुछ सेकण्ड पहले भी अगर इन्हें सूचना मिली तो ये कम्पनियाँ बाजार से अरबों रुपये लेकर छूमन्तर हो जाती हैं। ज्यादातर कम्पनियाँ अमरीका और जी–7 के अन्य देशों की हैं।
तकनीकी रूप से देखा जाये तो यह सारा काम गैरकानूनी है। कई विशेषज्ञ इसे इनसाइडर ट्रेडिंग कहते हैं। इनसाइडर ट्रेडिंग का मतलब है कम्पनी का डायरेक्टर, या कोई और किसी गोपनीय सूचना के आधार पर खुद ही शेयर खरीदता या बेचता है। जब सामान्य लोगों तक सूचना पहुँचती है उससे पहले वह या तो मुनाफा बुक कर चुका होता है या घाटे से बच जाता है। यह चिन्ता केवल काल्पनिक नहीं है। भारत में भी ऐसे कितने ही मामले पकड़े गये हैं। अमरीका में भी व्हाइट हाउस के टेलीप्रॉन्पटर ऑपरेटर पर राष्ट्रपति के भाषणों की अन्दरूनी जानकारी का इस्तेमाल करके शेयर मार्केट में मुनाफा कमाने का मामला सामने आया।
अब इनसाइडर ट्रेडिंग का खेल खुल्लमखुल्ला होगा। इस खेल में लागू करने ‘जिसकी लाठी उसकी भैंस’ वाला सिद्धान्त काम आयेगा। जो लाखों डॉलर हर महीने ट्रम्प की फर्म को देगा उसे पहले सूचना मिलेगी, वही करोड़ों डॉलर कमाएगा। एक छोटा निवेशक इन बड़े–बड़े दैत्याकार निवेशकों के सामने निहत्था मारा जाएगा। पहले से ही छोटे ट्रेडर्स की शेयर बाजार में कोई अच्छी स्थिति नहीं है। ऑप्शन और फ्यूचर में कारोबार करने वाले 90 फीसदी छोटे व्यापारी घाटे में हैं। यह घाटा एक लाख करोड़ से भी ज्यादा का है।
शेयर मार्केट जो पहले से ही जुआघर है, हालाँकि जुआघर के भी कुछ नियम–कानून होते हैं। आपने फिल्मों में देखा होगा कि कोई गुण्डा–मवाली जब जुआ खेलता है तो वह हारने पर सब कुछ लूटकर भागना चाहता है। वह जुए के सामान्य नियमों को भी नहीं मानता। आज ट्रम्प की सनक भी उसी हद तक बढ़ गयी है। जी–7 के देश पहले से ही दुनियाभर के देशों से हथियार, प्रतिबन्ध, तेल और तकनीक के नाम पर अरबों डॉलर कमाते हैं। अमरीका का यह नया तरीका साम्राज्यवादी गिरोह की लूट को और कई गुना बढ़ाएगा। भारत जैसे देशों में बदहाली की एक नयी इबारत लिखेगा।
ट्रम्प का यह फैसला पूँजीवाद के चैधरी अमरीका की आर्थिक स्थिति की भी पोल खोलता है। अब अमरीकी पूँजी अपने विस्तार के लिए दुनिया के अलग–अलग देशों में निवेश करके, उत्पादन बढ़ाकर मुनाफा नहीं कमाना चाहती। वह दुनिया को युद्धों में झोंककर, हथियार बेचकर, तेल पर कब्जा करके, राष्ट्रों को हथियाकर बेचकर और शेयर मार्केट में जुआ को प्रोत्साहित करके लूटना चाहती है। यह चरित्र महज ट्रम्प का चरित्र नहीं है बल्कि सटोरिया पूँजी का चरित्र है। आज दुनियाभर की अर्थव्यवस्थाएँ इन सटोरियों के लिए फुटबॉल बनी हुई हैं। वे मन चाही दिशा में इसे उछाल रहे हैं। यह भी सच ही है कि कोई भी खेल अन्तहीन नहीं होता। देर–सवेर इनका अन्त भी निश्चित है।
Leave a Comment
लेखक के अन्य लेख
- समाचार-विचार
-
- आईआईटी हैदराबाद के छात्र मार्क एंड्रयू चार्ल्स की आत्महत्या 15 Jul, 2019
- आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के नाम क्या–क्या खेल 1 Oct, 2026
- जनविरोधी यूनियन बजट 2022 13 Apr, 2022
- ट्रम्प मीडिया एण्ड टेक्नोलॉजी ग्रुप की काली करतूत 1 Oct, 2026
- दिल्ली में ‘नरेन्द्र गैंग’ सक्रिय 5 May, 2026
- निगरानी पूँजीवाद का बढ़ता दायरा 20 Aug, 2022
- पाकिस्तान में चुनाव और दो प्रतिक्रियावादी गिरोहों का टकराव 6 May, 2024
- प्रधानमंत्री के लिए हर मौत के मायने अलग हैं। 15 Jul, 2019
- सत्ता और सिस्टम की गोद में पले “शेल” बच्चे की चमकदार बायोग्राफी 9 Jun, 2026
- सत्य निकेतन हादसा : सत्ता के खून सने हाथ 1 Oct, 2026
- सरकार को सच पसन्द नहीं 15 Oct, 2019
- सर्वउपयोगी प्रवासी मजदूर 14 Dec, 2018
- साहित्य
-
- साहित्य लिखने की इच्छा 1 Oct, 2026
- अन्तरराष्ट्रीय
-
- झूठ के सामने दम तोड़ता सच 8 Feb, 2020
- ट्रम्प की वापसी : लोकतंत्र, इतिहास, वैश्विक व्यापार और पर्यावरण के लिए चिन्ताजनक 1 Jan, 2025
- वेनेजुएला के चुनाव में मादुरो की पुनर्वापसी 15 Aug, 2018
- वेनेजुएला संकट : आन्तरिक कम बाहरी ज्यादा है 14 Mar, 2019
- फिल्म समीक्षा
- राजनीति
-
- चुनावी ढकोसले के पीछे सत्ता का जन विरोधी चेहरा 13 Apr, 2022
- पण्डोरा पेपर्स 21 Nov, 2021
- लॉकडाउन, मजदूर वर्ग की बढ़ती मुसीबत और एक नयी दुनिया की सम्भावना 10 Jun, 2020
- राजनीतिक अर्थशास्त्र
-
- गिग अर्थव्यवस्था का बढ़ता दबदबा 14 Jan, 2021
- राफेल घोटाला : आखिर सच क्या है? 3 Dec, 2018
- व्यंग्य
- अवर्गीकृत