वरना हम तुम्हें मार डालेंगे
केविन बैरी आयरिश स्वतन्त्रता आन्दोलन के एक नायक थे। वे आयरलैण्ड पर ब्रिटिश कब्जे के खिलाफ स्वतन्त्रता संग्राम (1919–21) के दौरान आयरिश रिपब्लिकन आर्मी (आईआरए) के सदस्य थे। 1920 में, उन्होंने एक ब्रिटिश आपूर्ति ट्रक पर किये गये हमले में हिस्सा लिया था। एक ब्रिटिश सैनिक के मारे जाने के बाद, बैरी को पकड़ लिया गया, उन्हें प्रताड़ित किया गया और आखिरकार फाँसी पर लटका दिया गया। वे केवल अठारह साल के थे। उनके बारे में एक प्रसिद्ध गीत है, जिसे इतने लोगों ने गाया है कि उन सभी के नाम यहाँ नहीं लिखे जा सकते, लेकिन उनमें से एक पॉल रोबसन भी है। इस गीत की एक पंक्ति उस कड़वे सच को उजागर करती है जो हमेशा औपनिवेशिक और साम्राज्यवादी शासन की बुनियाद रहा है–– हत्या।
फाँसी के फन्दे का सामना करने से ठीक पहले,
अपनी उस सूनी और अंधेरी जेल की कोठरी में,
ब्रिटिश सैनिकों ने बैरी को बहुत तड़पाया और प्रताड़ित किया,
सिर्फ इसलिए, क्योंकि वे बताने को तैयार नहीं थे।
अपने उन बहादुर साथियों के नाम,
और वे अन्य बातें, जो वे (अंग्रेज) जानना चाहते थे।
“मुखबिर बन जाओ वरना हम तुम्हें मार डालेंगे,”
केविन बैरी ने जवाब दिया–– “नहीं।”
“मुखबिर बन जाओ वरना हम तुम्हें मार डालेंगे।” और उन्होंने उसे मार ही डाला। आज के समय में तेजी से आगे बढ़ रहे और संयुक्त राज्य अमरीका के वर्तमान ‘किलर–इन–चीफ’ (मुख्य हत्यारे), डोनाल्ड ट्रम्प पर विचार करें। वे फलस्तीनियों से कहते है कि–– छोड़कर चले जाओ, वरना हम तुम्हें मार डालेंगे। वे इजराइल से कहते है कि–– जब तुम उन्हें मारोगे तो, हम तुम्हें शह देंगेे। वे ईरानियों से कहते है कि–– सौदा करो, वरना हम तुम्हें मार डालेंगे। वे वेनेजुएला के राष्ट्रपति और उनकी पत्नी का अपहरण कर लेते हैं और कहते है कि–– देखो, हम तुम्हें जेल में डाल देंगे और इस प्रक्रिया में अगर सैकड़ों लोग मारे भी जाते हैं, तो हमें कोई फर्क नहीं पड़ता। वे उन नावों में सवार व्यक्तियों से, जिन पर उन्होंने बमबारी की है, कहते है कि–– कितने अफसोस की बात है कि हमें तुम्हें मारना पड़ा। वे अपने ‘स्टेट ऑफ द यूनियन’ के उग्र भाषण में यह दावा करते है कि–– देखो, वेनेजुएला के तट पर अब कोई मछली पकड़ने नहीं जा रहा है। वे क्यूबावासियों से कहते है कि–– हम तुम्हें धीरे–धीरे मारेंगे, जैसा कि हम बरसों से करते आ रहे हैं, लेकिन अब हम तुम्हें सीधे खत्म कर देंगे, ताकि एक ही बार में तुम्हारा नामो–निशान मिटा दिया जाये। वे डेनवासियों से कहते है कि–– हम ग्रीनलैण्ड को सीधे तरीके से भी ले सकते हैं और टेढ़े तरीके से भी। दुनिया के हर कौने में ट्रम्प चीख–चीख कर कह रहे हैं कि हम जब चाहें तब, तुम्हारे ऊपर मौत की बारिश कर सकते हैं। हम तुम्हारे जहाजों और विमानों को उड़ा देंगे, चाहे तुम चीन हो या रूस।
इस साम्राज्यवादी हिंसा को ट्रम्प ने ईजाद नहीं किया था। यह शुरुआत से ही इस राष्ट्र के बाकी दुनिया के साथ सम्बन्धों का एक अभिन्न अंग रही है। हालाँकि, ट्रम्प उन बातों को खुलेआम कहने में कहीं अधिक स्पष्ट हैं जिन्हें पिछले राष्ट्रपतियों ने स्वीकार करने में हिचकिचाहट दिखायी थीय इसके बजाय वे या तो इसे जनता की नजरों से छिपा कर रखते थे, इसे ‘आत्मरक्षा’ का नाम देकर जायज ठहराते थे या डराने–धमकाने के बेहद बारीक तरीकों का सहारा लेते थे।
इस तरह की अन्तरराष्ट्रीय क्रूरताएँ और अत्याचार अन्तिम तौर पर अपने ही देश पर पलटवार करते हैं। हालाँकि, संयुक्त राज्य अमरीका में इस प्रक्रिया के होने में कुछ समय लगा है। ऐसा इसलिए है क्योंकि इस देश का निर्माण ही हत्या, प्रताड़ना और मूल निवासियों तथा काले गुलामों के भयानक शोषण और उनकी सम्पत्ति व जमीन की जबरन लूट पर हुआ था। बाद वालों से कहा गया कि–– काम करो या मरो, बलात्कार के आगे घुटने टेको या मार दिये जाओगे। पहले वालों (मूल निवासियों) का लगभग पूरी तरह से सफाया कर दिया गया और बाकी बचे लोगों से कहा गया कि–– अपनी मातृभूमि छोड़ दो या मरने के लिए तैयार रहो।
दूसरी ओर, श्वेत लोग अक्सर इन लूट–खसोट और अत्याचारों में स्वेच्छा से भागीदार रहे हैं, हालाँकि श्वेत महिलाओं की अधीनता और निम्न स्थिति तब भी बहुत गहरी थी और आज भी वैसी ही बनी हुई है। श्वेत होने के बहुत सकारात्मक लाभ थे और यह बात आज भी उतनी ही सच है, जैसा कि किसी भी पैमाने से मालूम हो जाता है। गरीब श्वेत लोगों ने भी सत्ता के हाथों बहुत दुख झेले हैं, लेकिन यह उस स्तर के आसपास भी नहीं था जिसे अश्वेतों और अन्य रंगभेद का शिकार हुए लोगों ने अनुभव किया है।
ट्रम्प और उनके करीबी सलाहकारों तथा उनके हजारों अनुयायियों द्वारा फासीवाद की ओर किया गया यह झुकाव, संयुक्त राज्य अमरीका द्वारा कई दशकों से किये गये वैश्विक उपनिवेशवाद और साम्राज्यवाद का ही परिणाम है। नाजी नीतियों से प्रेरणा लेते हुए (जो खुद अमरीका द्वारा मूल निवासियों और गुलामों के साथ किये गये व्यवहार से प्रभावित थी), दूसरे ट्रम्प प्रशासन ने विश्वविद्यालयों, मीडिया, कानूनी व्यवस्था, कांग्रेस और अदालतों पर कार्यकारी शाखा (एग्जीक्यूटिव ब्रांच) के नियंत्रण को और भी गहरा कर दिया है। बाद वाले ने, खासतौर पर सर्वोच्च न्यायालय ने, राष्ट्रपति को अपनी मर्जी से कुछ भी करने की असाधारण शक्तियाँ प्रदान कर दी है। उनके तथाकथित ‘बिग ब्यूटीफुल बिल’ ने, पहले से ही असाधारण रूप से अमीर लोगों को और अधिक समृद्ध बनाने के साथ–साथ, ट्रम्प और उनके स्टीफन मिलर और स्टीव बैनन जैसे फासीवादी सलाहकारों को लगभग असीमित धन के साथ ‘गुण्डों का एक अर्धसैनिक बल’ बनाने की अनुमति दे दी है, ताकि वे उन सभी को डरा सकें, पीट सकें, गिरफ्तार कर सकें और मार सकें जो उनकी अकारण हिंसा का विरोध करते हैं। इसमें शामिल हैं––
–– साइबर सुरक्षा और बुनियादी ढाँचा सुरक्षा एजेंसी (सीआईएसए)–– ये महत्वपूर्ण बुनियादी ढाँचे (जैसे बिजली, पानी और इण्टरनेट) की साइबर हमलों से सुरक्षा करती है।
–– अमरीकी सीमा शुल्क और सीमा सुरक्षा (सीबीपी)–– यह सीमाओं और व्यापार का प्रबंधन करती है।
–– अमरीकी अप्रवासन और सीमा शुल्क प्रवर्तन (आईसीई)–– यह अप्रवासन और सीमा शुल्क कानूनों को लागू करने का काम करती है।
–– संघीय आपातकालीन प्रबन्धन एजेंसी (एफईएमए)–– यह आपदा प्रतिक्रिया और राहत कार्यों का प्रबन्धन करती है।
–– परिवहन सुरक्षा प्रशासन (टीएसए)–– यह परिवहन प्रणालियों, विशेषकर हवाई अड्डों की सुरक्षा सुनिश्चित करती है।
–– अमरीकी सीक्रेट सर्विस (यूएसएसएस)–– यह देश के नेताओं की सुरक्षा और वित्तीय बुनियादी ढाँचे की रक्षा करती है।
–– अमरीकी नागरिकता और अप्रवासन सेवा (यूएससीआईएस)–– यह कानूनी अप्रवासन की प्रक्रियाओं का प्रबन्धन करती है।
–– अमरीकी तटरक्षक बल (यूएसजीएस)–– यह समुद्री सुरक्षा और समुद्री रक्षा के लिए जिम्मेदार है।
–– संघीय कानून प्रवर्तन प्रशिक्षण केन्द्र (एफएलईटीसी)–– यह संघीय कानून प्रवर्तन अधिकारियों को प्रशिक्षित करता है।
–– संघीय सुरक्षा सेवा (एफपीएस)–– यह संघीय सुविधाओं (इमारतों और कार्यालयों) की सुरक्षा करती है।
इन एजेंसियों का मौजूदा बजट बहुत बड़ा है, जिसमें अकेले आईसीई (अप्रवासन और सीमा शुल्क प्रवर्तन) को लगभग 80 अरब डॉलर मिल रहे हैं। कल्पना कीजिए उस विनाश की, जो इसने इनसानों, उनके घरों और उनके समुदायों को पहुँचाया है और भविष्य में पहुँचाता रहेगा। अब, हर वह व्यक्ति जो अपराधियों के इस गिरोह का विरोध करता है, उसके ऊपर क्रूर गिरफ्तारी, अन्धाधुन्ध हिंसा, कारावास, प्रताड़ना और मृत्यु का खतरा मँडरा रहा है। जो कोई भी किसी भी तरह से विरोध करता है, वह इस कठोर व्यवहार से अछूता नहीं है–– चाहे वह काला हो, श्वेत हो, अप्रवासी हो या फिर मूल निवासी हो, पुरुष हो, महिला हो या बच्चा हो–– कोई भी नहीं। हर किसी ने मिनियापोलिस में हुई उन हत्याओं को देखा है, जहाँ श्वेत महिला या पुरुष होना भी किसी की हत्या किये जाने में बाधा नहीं बना था। ठीक उसी तरह जैसे संयुक्त राज्य अमरीका दूसरे देशों के लोगों से कहता है–– हुक्म मानो वरना हम तुम्हें मार देंगे–– अब वह यही बात अपने ही लोगों से कह रहा है, उन सभी से। जैसा कि पत्रकार और इतिहासकार निक टर्स ने हाल ही में लिखा है––
“डोनाल्ड ट्रम्प के युग में अप्रवासन अधिकारियों की कई बदसलूकियों और हिंसक युक्तियों में से कुछ–– पर्यवेक्षकों की हत्या करना, उन्हें घायल करना, धमकाना या उनकी जाँच करना मात्र है। अन्य युक्तियों में बन्दियों को बेरहमी से पीटना, प्रतिबन्धित चोकहोल्ड का इस्तेमाल करना या प्रदर्शनकारियों पर रासायनिक उत्तेजक छिड़कना शामिल है। उन्होंने मनमानी और अवैध गिरफ्तारियाँ तथा हिरासतें भी की हैं, भीड़ पर आँसू गैस और फ्लैश–बैंग ग्रेनेड दागे हैं और वाहनों के शीशे चकनाचूर कर दिये हैं।”
इन खतरनाक परिस्थितियों का जवाब क्या होना चाहिए? 1937 में एक व्याख्यान के रूप में दिये गये अपने निबन्ध ‘अन्तर्विरोध के बारे में’ में माओ त्से तुंग ने तर्क दिया है कि ‘प्रधान’ और ‘गौण’ अन्तर्विरोध होते हैं और जब तक प्रधान अन्तर्विरोध हल नहीं हो जाता, तब तक गौण अन्तर्विरोधों को हल नहीं किया जा सकता। आज, अगर हम माओ के निबन्ध के नजरिये से दुनिया को देखें, जो इस मामले में मार्क्स के नजरिये के समान ही होगा, तो ‘प्रधान अन्तर्विरोध’ संयुक्त राज्य अमरीका की ताकत और बाकी दुनिया, खासतौर से वैश्विक दक्षिण के राष्ट्रों की अधीनता के बीच का है। उदाहरण के लिए, इण्डोनेशिया के भीतर जो भी अन्तर्विरोध मौजूद हैं–– जैसे कि इण्डोनेशियाई पूँजीपतियों और इण्डोनेशियाई मजदूरोंं के बीच का अन्तर्विरोध–– उनको तब तक हल नहीं किया जा सकता जब तक कि प्रधान अन्तर्विरोध हल नहीं हो जाता। यानी, जीवन के अधिक से अधिक क्षेत्रों में वास्तविक समानता पर आधारित दुनिया बनाने की सम्भावना के लिए, संयुक्त राज्य अमरीका की ताकत को खत्म करना ही होगा। इसका अर्थ है अमरीकी सत्ता और उस ‘एकाधिकारी पूँजी’ की पराजय, जिस पर वह टिकी हुई है और जिसके साथ वह गहराई से जुड़ी हुई है।
संयुक्त राज्य अमरीका में रहने वाले जो भी लोग आमूलचूल परिवर्तन की जरूरत को समझते हैं, उनका यह एक जरूरी कर्तव्य है कि वे अपना जो भी समय और प्रयास हो सके, उसे अमरीकी सत्ता और अमरीकी पूँजीपति द्वारा पूँजी संचय और वैश्विक शक्ति प्राप्त करने के कामों का विरोध के लिए खुद को समर्पित कर दें। यह हमारी सबसे पहली चिन्ता होनी चाहिए, क्योंकि हम प्रधान अन्तर्विरोध के स्रोत में मौजूद हैं। हमें उन सभी कार्यों का दृढ़ता से विरोध करना चाहिए जो संयुक्त राज्य अमरीका वैश्विक दक्षिण के सम्बन्ध में करता है, चाहे वे टैरिफ हों, नाकेबन्दी हो, प्रतिबन्ध हों, अमरीकी ‘शत्रुओं’ पर लक्षित सैकड़ों सैन्य ठिकाने हों, हिंसा की धमकियाँ हों, प्रत्यक्ष सैन्य हस्तक्षेप हों, अप्रत्यक्ष युद्ध हों (जैसा कि यूक्रेन के युद्ध में है) या फिर परमाणु हथियारों का भारी जखीरा हो–– बिना किसी अपवाद के सब कुछ। अपने देश के भीतर भी हमें यही रूख अपनाना चाहिए। हमें अमरीकी सत्ता और अमरीकी पूँजी के उन सभी कामों का विरोध करना चाहिए जो मजदूरों, गैर श्वेत लोगों, महिलाओं, समलैंगिक और ट्रांसजेण्डर व्यक्तियों का दमन करते हैं और वह सब कुछ जो पर्यावरण को नष्ट करता है–– सब कुछ।
इन सकारात्मक कामों का स्वाभाविक नतीजा यह है कि कुछ चीजें ऐसी भी हैं जो हमें नहीं करनी चाहिए। इसे झूठी समानताओं के सन्दर्भ में सबसे अच्छी तरह व्यक्त किया जा सकता है। उदाहरण के लिए, रूस और संयुक्त राज्य अमरीका एक समान नहीं हैं। वह (रूस) एक साम्राज्यवादी ताकत नहीं है और उसका उदेश्य साम्राज्य बनाना या दुनिया भर में सैन्य ठिकाने स्थापित करना नहीं है। चीन के मामले में भी यही सच है। ईरान न तो इजरायल है और न ही संयुक्त राज्य अमरीका, निकोलस मादुरो ट्रम्प नहीं हैं। अगर कुछ लोग कहते हैं कि चीन एक साम्राज्यवादी ताकत है या उसने शिनजियांग में नरसंहार किया है, या उसने कोविड–19 वायरस बनाया है, तो वे केवल अमरीकी सरकार द्वारा चीन के खिलाफ भड़काई गयी नफरत को ही मजबूत करते हैं। अगर वे अपहरण का विरोध करने के साथ–साथ मदुरो की निन्दा करने के लिए भी खुद को मजबूर महसूस करते हैं, तो वे अमरीकी सरकार के उस लक्ष्य को समर्थन देते हैं, जो वेनेजुएला के समाजवादी रास्ते को खत्म करता है। अगर वे अपना पूरा ध्यान केवल रूस के विश्वासघात पर ही केन्द्रित करते हैं, तो अन्तिम तौर पर वे एक ऐसे युद्ध का समर्थन करने लगते हैं जो वास्तव में संयुक्त राज्य अमरीका और नाटो द्वारा रूस के खिलाफ लड़ा जा रहा है, जिनमें से किसी को भी यूक्रेनी लोगों के जीवन की रत्ती भर भी परवाह नहीं है।
घरेलू स्तर पर, सोशल डेमोक्रेसी (जिसे सामाजिक जनवाद भी कहा जाता है) समाजवाद नहीं है और न ही यह कभी होगा। सोशल डेमोक्रेसी का विरोध करना स्तालिनवाद नहीं है और न ही खुद को कम्युनिस्ट घोषित करने से कोई व्यक्ति “टैन्काई” बन जाता है, या वह कोई भी अन्य अपमानजनक शब्द जिससे सोशल डेमोक्रेट्स उनको पुकारते हैं। मिनियापोलिस जैसे जन आन्दोलन इस वक्त बेहद महत्वपूर्ण हैं। मुझे उम्मीद है कि उभरते हुए फासीवाद के विरुद्ध ऐसे विद्रोह जारी रहेंगे तथा और भी ज्यादा गहरे होंगे। लेकिन यह कल्पना न करें कि सफलता किसी ‘वास्तविक क्रान्तिकारी आन्दोलन’ के निर्माण के बिना सम्भव होगी।
“ऐसा करों वरना हम तुम्हें मार देगें”, यह पूँजीवाद की स्वाभाविक स्थिति है। चाहे कोई भी अस्थायी बदलाव क्यों न हो जाये, स्थिति ऐसी ही बनी रहेगी। इस सच्चाई को नजरअंदाज करना हमारे लिए खतरनाक साबित हो सकता है।
‘मन्थली रिव्यू ऑनलाइन पर प्रकाशित’,
अनुवाद–– सोनू पवांर
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