इन्स्टाग्राम : बच्चों के यौन शोषण को बढ़ावा
हाल ही में मेक्सिको की कोर्ट ने मेटा–इन्स्टाग्राम को बाल शोषण और पोर्नोग्राफी को बढ़ावा देने का दोषी पाया। उस पर लगभग 35 अरब रुपये का जुर्माना लगाया गया है। लेकिन यह केवल मेक्सिको तक सीमित नहीं है। साइबर टिपलाइन की हालिया रिपोर्ट के अनुसार पिछले साल दुनियाभर में मेटा के खिलाफ बाल शोषण के लगभग एक करोड़ 90 लाख मामले दर्ज हुए हैं। ये मामले इन्स्टाग्राम और फेसबुक, जो मेटा का हिस्सा हैं, उसपर अश्लील वीडियो और विज्ञापनों के जरिये छोटे बच्चों को उकसाने और फर्जी अकाउण्ट बनाकर बच्चों का यौन उत्पीड़न करने के खिलाफ दर्ज हुए हैं। बाल शोषण और पोर्नोग्राफी को बढ़ावा देने में केवल मेटा ही नहीं बल्कि टेलीग्राम समेत बड़ी–बड़ी बहुराष्ट्रीय सोशल मीडिया कम्पनियाँ इस काले कारनामे में शामिल हैं।
बीबीसी ने अपनी पड़ताल में मेटा और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिये पोर्नोग्राफी को बढ़ावा देने का भण्डाफोड़ किया है। उनकी एक पत्रकार ने इन्स्टाग्राम पर फेक टीनेजर अकाउण्ट बनाया। उस अकाउण्ट पर हर 10 रील्स में से एक आपत्तिजनक और अश्लील थी। जब उन्होंने इन अश्लील रील्स पर प्रतिक्रिया दी तो इनकी संख्या बढ़ गयी। कुछ समय बाद उनके सामने अधेड़ उम्र के पुरुष और छोटी बच्चियों की पोर्न वीडियो तक आने लगी थी। इसके बाद इनका असली खेल शुरू होता है। पहले यह अश्लील रील्स के जरिये उत्तेजना पैदा करते हैं, उसके बाद विज्ञापनों के जरिये उन्हें फँसाते हैं। पत्रकार ने यह दिखाया कि इन रील्स के बीच में विज्ञापन आने शुरू हो जाते हैं जिसमें ‘चाइल्ड विडियो’, ‘रेप विडियो’ जैसे शब्द खुलेआम इस्तेमाल हो रहे थे। इन विज्ञापनों पर एक क्लिक करते ही टेलीग्राम एप्प खुलता है जो ऐसी अश्लील सामग्रियों से भरा पड़ा है और जिसमें पैसे के बदले वीडियो के लिंक दिये हुए हैं। यह खेल सिर्फ विज्ञापनों तक सीमित नही है बल्कि इससे आगे बढ़ते हुए ये बच्चों को वेश्यावृत्ति और यौन अपराधों की तरफ भी धकेल रहे हैं।
जब मेटा और टेलीग्राम को इसके बारे में बताया गया तो पहले उनकी तरफ से इस प्लेटफार्म पर होने वाली ऐसी गतिविधियों से साफ इनकार कर दिया गया। लेकिन बाद में जब सबूतों को सामने रखा गया तो उन्होंने अपनी गलती मानने की जगह यह दलील दी कि कोई भी सिस्टम परफेक्ट नहीं होता है। आगे उन्होंने कहा कि हम कड़े नियम लागू कर इन आपत्तिजनक अकाउण्ट और विज्ञापनों को ब्लाक करने का प्रयास कर रहे हैं। टेलीग्राम ने कहा कि 2026 में हमने लगभग ऐसे 2 लाख 74 हजार ग्रुप और चैनलों को हटाया है। तथ्य इसके उलट गवाही दे रहे हैं। दरअसल न्यू मैक्सिको की अदालत ने पाया कि इन कम्पनियों ने अपने प्लेटफार्म की सुरक्षा के बारे में उपभोक्ताओं को गुमराह किया है और अपने मुनाफे के लिए यौन शोषण करने वाले गिरोह को बढ़ावा दिया है। इसके साथ ही अदालत में यह भी साबित हुआ कि मेटा को अपने प्लेटफार्म पर होने वाले यौन शोषण की जानकारी पहले से थी जिसको उसने भारी मुनाफे के सामने नजरअंदाज कर दिया था।
केवल भारत की बात करें तो एनसीआरबी के आँकड़ों के अनुसार साल 2024 में बच्चों के खिलाफ अपराध के एक लाख 8 हजार 702 केस दर्ज किये गये। जिनमें साल दर साल बढ़ोतरी हो रही है। इन आँकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि हर 10 में 9 साइबर अपराध ऐसे थे जिनमें बच्चों के अश्लील वीडियो को इन्स्टाग्राम पर सार्वजानिक किया गया था। दरअसल इन्स्टाग्राम पर लाखों फेक एकाउण्ट्स हैं जो बच्चों को उकसाकर उनकी नग्न फोटो और वीडियो हासिल कर लेते हैं। जिसके बदले में वे उन्हें ब्लैकमेल कर पैसे माँगते हैं। इस कारण कई नाबालिग बच्चों ने आत्महत्या कर ली और कुछ अवसाद के शिकार हो गये। यहाँ तक कि कई लड़कियों को इन्होंने झाँसा देकर वेश्यावृत्ति तक में धकेल दिया है। इन सभी पर मेटा मौन है और वह सुरक्षा मानकों को ढीला करता जा रहा है।
हाल ही में मेटा के एक पूर्व कर्मचारी ने मेटा के खिलाफ चल रहे बाल सुरक्षा के मुकदमे में गवाही देते हुए बताया कि मेटा की संस्कृति में उपयोगकर्ताओं की संख्या को बढ़ाने को लेकर जुनून है जिसके चलते मेटा के कर्मचारी लगातार सुरक्षा की अनदेखी करते हैं। इसके साथ ही उन्होंने इसके लिए मेटा के मालिक मार्क जुकरबर्ग को पूर्ण रूप से जिम्मेदार ठहराया है। मेटा सुरक्षा मानकों को इसलिए नजरन्दाज कर रही है क्योंकि इन्स्टाग्राम को इस्तेमाल करने वाले टीनेजर की संख्या करोड़ो में है। मेटा के अधिकारिक आँकड़ों के अनुसार, इन्स्टाग्राम पर 13 से 15 साल की उम्र के बच्चों की संख्या 5 करोड़ से अधिक है हालाँकि मेटा ने पूरा आँकड़ा नहीं बताया है। प्यू रिसर्च सेण्टर ने अमरीका में एक सर्वे में पाया कि हर 10 टीनेजर में से 6 इन्स्टाग्राम उपयोगकर्ता हैं। इन तथ्यों से साबित होता है कि ये बच्चे मेटा के मुनाफा कमाने की मशीन हैं। एक तरफ जहाँ मेटा का वित्तीय साम्राज्य मुनाफे के नित नये रिकॉर्ड तोड़ रहा है, कम्पनी का वार्षिक राजस्व 200 अरब डॉलर यानि 16–5 लाख करोड़ रुपये के आँकड़े को पार कर चुका है। इसमें से 97 प्रतिशत से अधिक हिस्सा केवल विज्ञापनों से आता है। दूसरी तरफ इस मुनाफे की कीमत दुनिया के मासूम बच्चे चुका रहे हैं।